परिशिष्ट
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जनरल अथवा सम्बद्ध गवर्नर उस विधेयक का कार्यान्वयन एक वर्ष के लिए स्थगित कर देगा। एक वर्ष की अवधि के पश्चात् गवर्नर जनरल अथवा सम्बद्ध गवर्नर उस विधेयक पर पुनः विचार हेतु विधानमंडल को वापस भेजेगा। विधानमंडल द्वारा विधेयक पर आगे विचार किए जाने के बाद और विधेयक पर की गई आपत्तियां दूर करने के लिए संशोधन करने से इन्कार किए जाने पर गवर्नर जनरल अथवा गवर्नर अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए उस पर अपनी सहमति प्रदान करेगा अथवा रोक देगा, परंतु शर्त यह रहेगी कि उस विधेयक की वैधता को प्रभावित संप्रदाय के दो सदस्यों द्वारा उच्चतम न्यायालय में इस आधार पर चुनौती दी जा सकेगी कि वह विधेयक उस विशेष समुदाय के मौलिक अधिकारों पर विपरीत प्रभाव डालता है।
मुसलमानों के विशेष दावे
(क) पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत का गवर्नर शासित प्रांत के रूप में उन्हीं आधारों पर गठन किया जाएगा, जैसा कि अन्य प्रांत बनाए गए हैं, परंतु सीमा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रांत का गठन किया जाएगा।
प्रांतीय विधानमंडल का गठन करने में पूरी संख्या के दस प्रतिशत से अधिक नामजद सदस्य नहीं होंगे।
(ख) सिंध को बम्बई प्रेसीडेंसी से अलग कर दिया जाएगा और ब्रिटिश इंडिया के अन्य गवर्नर शासित प्रांतों के समान प्रांत बना दिया जाएगा।
(ग) केंद्रीय विधानमंडल के कुल सदस्यों की संख्या के एक तिहाई सदस्य मुसलमान होंगे और केंद्रीय सभा में उनका प्रतिनिधित्व पिछले पृष्ठ पर दी गई तालिका में दी गई संख्या से कम न होगा।
दलित वर्गों के विशेष दावे
(क) संविधान उन सभी परंपराओं, रीति-रिवाजों को अवैध घोषित करेगा, जिनके कारण देश के किसी नागरिक को उसके साथ बरते गए भेदभाव या लगाए गए प्रतिबंधों के फलस्वरूप दंडित किया जाता है और उनके नागरिक अधिकारों का हनन किया जाता है।
(ख) सरकारी नौकरियों में भर्ती करते समय उनके साथ रियायत बरती जाएगी और पुलिस तथा सैनिक सेवाओं के लिए उनकी भर्ती खोली जाएगी।
(ग) पंजाब में पंजाब के हस्तांतरण अधिनियम में दलितों को भी लाभान्वित किया जाएगा।