322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) किसी अधिकारी द्वारा दलित वर्गों के साथ दुव्यर्वहार करने अथवा उनके हितों की उपेक्षा करने पर उन्हें गवर्नर अथवा गवर्नर जनरल के यहां अपील करने का अधिकार होगा।
(घ) दलित वर्गों को अनुलग्नक में निर्दिष्ट किए गए प्रतिनिधित्व से कम प्रतिनिधित्व नही दिया जाएगा।
एंग्लो-इंडियन समुदाय के विशेष दावे
(अ) उप-समिति संख्या 8 (सेवाएं) द्वारा दावों की उदारतापूर्वक व्याख्या किए जाने पर दी गई स्वीकृति और उस संप्रदाय की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकारी सेवाओं में उनका विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि उनके जीवनयापन का स्तर कायम रह सके।
(ब) उन्हें अपनी शिक्षा व संस्थाओं अर्थात् यूरोपियन शिक्षा को चलाने और नियंत्रण रखने का पूरा अधिकार होगा, बशर्ते संस्थाओं पर मंत्री का नियंत्रण हो।
(स) अन्य समुदायों की तरह जूरी अधिकार होंगे। वैधता के प्रमाण जारी रहेंगे और उस वर्ग के अभियुक्तों के मुकदमों की सुनवाई यूरोपियन या भारतीय जूरी करेगी।
यूरोपियन समुदायों के लिए विशेष दावे
(अ) देश में जन्में लोगों के समान उपयोग की जाने वाली समस्त सुविधाएं समान रूप से उन्हें भी उपलब्ध होंगी।
(ब) फौजदारी मुकदमा चलाने की वर्तमान प्रक्रिया के संबंध में किसी प्रकार का संशोधन अथवा परिवर्तन करने का विधेयक उस समय तक नहीं लाया जा सकेगा, जब तक कि उससे पहले गवर्नर जनरल से उस विधेयक के पेश करने की स्वीकृति न ले ली जाए।
समर्थक -
सर आगा खां (मुसलमानों की ओर से)
डॉक्टर अम्बेडकर (डिपे्रस्ड क्लासेज की ओर से)
राव बहादुर पन्निर सेलवम (इंडियन क्रिश्चियन की ओर से)
सर हेनरी गिडने (एंग्लो-इंडियन की ओर से)
सर हुबट कार्र (यूरोपियन की ओर से)