1. अनोखी घटना - Page 34

अनोखी घटना

19

पर डिप्रेस्ड क्लासेस का समर्थ्न पाने की इच्छुक थी, तथापि वह यह भी जानती थी कि उसे मसर्थन मिलेगा नहीं। यद्यपि कांग्रेस उस समय लोगों को आज की तरह भ्रष्ट करने का कार्य नहीं कर रही थी क्योंकि वह इस कार्य में तब उतनी निपुण नहीं थी। तब कांग्रेस ने अपने भूतपूर्व अध्यक्ष सर नारायण चन्द्रावरकर की सेवाओं को सूचीबद्ध कर लिया था। डिप्रेस्ड क्लासेस मिशन सोसायटी के अध्यक्ष की हैसियत से उन्होंने डिप्रेस्ड क्लासेस पर काफी प्रभाव डाला। उन्हीं के प्रभाव तथा उनके प्रति आदर भाव के परिणामस्वरूप डिप्रेस्ड क्लासेस का एक वर्ग लीग योजना को समर्थन देने के लिए सहमत हो गया।

प्रस्ताव के पाठ से स्पष्ट है कि डिप्रेस्ड क्लासेस ने कांग्रेस लीग स्कीम को बिना शर्त समर्थन नहीं दिया। उसने कांग्रेस को इस शर्त पर समर्थन देना मंजूर किया कि कांग्रेस अस्पृश्यों की समस्त सामाजिक अयोग्यताओं को दूर करने का प्रस्ताव पास करेगी। डिप्रेस्ड क्लासेस के साथ सर नारायण चन्द्रावरकर के माध्यम से हुए समझौते को कांग्रेस के इस प्रस्ताव से साकार रूप दिया गया।

इससे डिप्रेस्ड क्लासेस के विषय में 1917 के कांग्रेस के प्रस्ताव का मूल कारण और सर नारायण चन्द्रावरकर की अध्यक्षता में पारित डिप्रेस्ड क्लासेस के प्रस्तावों से इसका अंतर्संबंध भी स्पष्ट हो जाता है। इस स्पष्टीकरण से यह सिद्ध हो जाता है कि कांग्रेस के प्रस्ताव के पीछे धोखे की भावना छिपी थी। वह नैतिक उद्देश्य नहीं, वरन् राजनीतिक उद्देश्य था।

कांग्रेस के प्रस्ताव का क्या हुआ? डिप्रेस्ड क्लासेस ने अपने प्रस्ताव में फ्सवर्ण हिंदुओंय् से जो राजनीतिक अधकिरों का दावा कर रहे थे, मांग की कि वे डिप्रेस्ड क्लासेस पर से पतित होने के कलंक को मिटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं क्योंकि उन बुराइयों ने उन्हें अपने ही देश में गुलाम बना रखा है और उनकी दशा बहुत

खराब है। कांग्रेस ने डिप्रेस्ड क्लासेस की उपरोक्त मांग पर क्या प्रभावी कदम उठाए? कांग्रेस को जो समर्थन मिला था उसके बदले में वह प्रस्ताव में व्यक्त भावनाओं को मूर्त रूप देने के लिए अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान छेड़ने के लिए वचनबद्ध थी। परन्तु कांग्रेस ने किया कुछ नहीं। कांग्रेस द्वारा प्रस्ताव पास करना केवल अनचाही औपचारिकता थी। डिप्रेस्ड क्लासेस ने कांग्रेस-लीग स्कीम को समर्थन देने के लिए जो शर्त लगाई थी उसका औपचारित रूप से ही पालन किया गया। यह इसलिए किया गया ताकि कांग्रेसी लोगों पर यह दोष न लगाया जा सके कि वे अस्पृश्यों पर हो रहे अमानुषिक अत्याचारों को दूर करने के लिए हृदय से पश्चाताप नहीं करते। यह प्रस्ताव केवल मृत प्रस्ताव था, जिसका कोई परिणाम नहीं निकला।

इस प्रकार फ्कांग्रेस ने अस्पृश्यों के लिए क्या कियाय्, इसके इतिहास का प्रथम अध्याय समाप्त हुआ।