1. अनोखी घटना - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इससे स्पष्ट है कि श्री नारायण चन्द्रावरकर की अध्यक्षता में बम्बई में हुए अधिवेशन में डिप्रेस्ड क्लासेस द्वारा पास किए गए प्रस्ताव तथा 1917 में डिप्रेस्ड क्लासेस के उत्थान के लिए कांग्रेस द्वारा पारित प्रस्ताव के बीच गहरा संबंध इस संबंध को 1917 की घटनाओं के प्रसंग में आसानी से समझा जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 1917 में और विशेषकर 20 अगस्त, 1917 को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के भारत सेक्रेटरी श्री मान्टेग्यू ने हाउस ऑफ कॉमन्स में ब्रिटिश साम्राज्य के अभिन्न अंग के रूप में भारत में प्रगतिशील उत्तरदायी सरकार की स्थापना के उद्देश्य से स्वायत्तशासी सरकार की स्थापना और इसके क्रमिक विकास करने संबंधी भारत के प्रति ब्रिटिश सम्राट की नई नीति की घोषणा की। भारत के जाने माने राजनीतिज्ञ ब्रिटिश शासन से इस प्रकार की घोषणा की आशा करते थे और ऐसी नीति का पूर्वानुमान लगाकर भारत के संवैधानिक ढांचे में परिवर्तन करने के लिए योजनाएं तैयार कर रहे थे। बनाई गई योजनाओं में से दो योजनाओं पर जनता का ध्यान केंद्रित हुआ। उनमें एक थी फ्स्कीम ऑफ दि नाइन्टीनय् और दूसरी थी फ्कांग्रेस लीग स्कीमय्। पहली योजना तत्कालीन इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के 19 अतिरिक्त निर्वाचित सदस्यों ने प्रस्तुत की। दूसरी योजना कांग्रेस और लीग द्वारा समर्थित मात्र राजनैतिक सुधारों की स्वीकृत योजना थी जिसे फ्लखनऊ पैक्टय् के नाम से जाना गया। दोनों योजनाएं 1916 में श्री मान्टेग्यू की घोषणा से एक वर्ष पहले बनाई जा चुकी थीं।

उन दोनों योजनाओं में से कांग्रेस केवल अपनी योजना को ही ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकृत कराने की इच्छुक थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लीग योजना को कांग्रेस राष्ट्रीय मांग का रूप और दर्जा देना चाहती थी। लेकिन यह तभी हो सकता था जब इस योजना को भारत के सभी संप्रदायों का समर्थन प्राप्त हो। मुस्ल्मि लीग ने योजना स्वीकार कर ली। अतः मुस्लिम लीग से समर्थन पाने का कोई प्रश्न नहीं उठा। इसके बाद डिप्रेस्ड क्लासेस आती हैं। यद्यपि वे मुसलमानों की तरह संगठित नहीं थे, परंतु अपने राजनैतिक अधकिरों के प्रति वे बहुत सजग थे जैसा कि उनके प्रस्तावों से स्पष्ट है। वे राजनैतिक रूप से ही जागरूक नहीं थे, वरन् वे कांग्रेस के पूर्णतया विरोधी भी थे। वास्तव में 1895 में जब श्री तिलक के अनुयायियों ने कांग्रेस को यह धमकी दी कि यदि सामाजिक बुराइयों का पर्दाफाश करने के लिए सोशल कान्फ्रेंस को अपने पंडाल का उपयोग करने दिया तो वे पंडाल को आग लगा देंगे। तब अस्पृश्यों ने कांग्रेस के विरुद्ध प्रदर्शन किया तथा उसका पुतला भी जलाया। तभी से कांग्रेस के प्रति उनका ऐसा विरोध चला आ रहा है। वर्ष 1917 में बम्बई में डिप्रेस्ड क्लासेस की दोनों सभाओं में पारित प्रस्ताव से कांग्रेस के प्रति डिप्रेस्ड क्लासेस की विरोधी भावना की पूरी झलक मिलती है। यद्यपि कांग्रेस लीग की सुधारों की योजना