2. तुच्छ प्रदर्शन - Page 36

अध्यायः 2

तुच्छ प्रदर्शन

कांग्रेस ने अपनी योजना त्याग दी

I

श्री गांधी ने भारतीय राजनीति में 1919 में प्रवेश किया। तत्पश्चात् शीघ्र ही वह कांग्रेस पर हावी हो गए। उन्होंने न केवल कांग्रेस पर अधिकार किया बल्कि उसका कायाकल्प कर कांग्रेस का स्वरूप ही बदल दिया। उन्होंने तीन मुख्य परिवर्तन किए। पुरानी कांग्रेस को कोई अधिकार प्राप्त नहीं थे। वह कांग्रेस केवल प्रस्ताव पास करके ही यह अपेक्षा करती थी कि ब्रिटिश सरकार उस प्रस्ताव को क्रियान्वित करेगी। यदि ब्रिटिश सरकार उस प्रस्ताव पर कोई अमल न करती तो साल-साल भर बाद उसी प्रस्ताव को दोहराया जाता। पुरानी कांग्रेस वास्तव में बुद्धिजीवियों का जमावड़ा थी। तत्कालीन कांग्रेस राजनैतिक आंदोलनों में भाग लेने के लिए जनता के बीच में नहीं जाती थी क्योंकि उसका जनशक्ति में विश्वास नहीं था। पुरानी कांग्रेस के पास कोई संगठन नहीं था और जन आंदोलन चलाने के लिए एकोई आर्थिक साधन भी नहीं थे। वह कांग्रेस ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालने, अपनी जनशक्ति का प्रदर्शन करने तथा राजनैतिक प्रदर्शन करने में विश्वास नहीं करती थी। नई कांग्रेस ने तो कायापलट ही कर दी। उसने सबके लिए कांग्रेस सदस्यता का दरवाजा खोलकर उसे जनसाधारण की संस्था बना दिया। सिर्फ चार आने वार्षिक देकर कोई भी व्यक्ति कांग्रेस का सदस्य बन सकता था। प्रस्ताव में असहयोग एवं सविनय अवज्ञा की नीति अपनाकर कांग्रेस ने अपनी स्थिति काफी सुदृढ़ कर ली। कांग्रेस ने असहयोग, सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं फ्जेल भरोय् आंदोलन की नीति बनाई। उसने देशव्यापी संगठन बनाया और कांग्रेस के पक्ष में सारे देश में प्रचार करने का अभियान चलाया। समाजोत्थान के लिए रचनात्मक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इन कार्यकलापों के वित्तपोषण के लिए एक करोड़ रुपए की धनराशि जुटानी आरंभ कर दी और इसे फ्तिलक स्वराजय् निधि का नाम दिया। इस प्रकार श्री गांधी ने 1922 तक आते-आते कांग्रेस का स्वरूप ही बदल दिया। नई कांग्रेस अपने नाम के अतिरिक्त पुरानी कांग्रेस से एकदम भिन्न हो गई।