2. तुच्छ प्रदर्शन - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वाले गुजरात को 26 लाख 22 हजार अर्थात् 97.4 प्रतिशत और महाराष्ट्र की जिसकी आबादी 69 प्रतिशत है केवल 43 हजार रुपए मिले अर्थात् केवल 1.6 प्रतिशत और कर्नाटक को जिसकी आबादी 13 प्रतिशत है केवल 25 हजार रुपए अर्थात् कुल अनुदान का 0.9 प्रतिशत मिला। मध्य प्रान्त में 47 हजार रुपए के अनुदान में से 55 प्रतिशत आबादी वाले हिंदुस्तानी जिलों को 37 हजार रुपए अर्थात् 78.7 प्रतिशत जबकि 45 प्रतिशत आबादी वाले मराठी भाषी जिलों को 10 हजार रुपए अर्थात् 21.2 प्रतिशत मिला। बिहार और उड़ीसा में 5 लाख 65 हजार रुपए के कुल अनुदान में से बिहार को मिला 5 लाख 15 हजार अर्थात् 91 प्रतिशत जबकि उसकी आबादी 73 प्रतिशत है और उड़ीसा को केवल 50 हजार रुपए अर्थात् 9 प्रतिशत जबकि उसकी आबादी 27 प्रतिशत है। अनुदानों के वितरण में इसी प्रकार की असमानताएं मद्रास प्रेसीडेंसी के तीनों क्षेत्रों में मिलती हैं।

निधियों का बंटवारा केवल सिद्धांतहीन ही नहीं था वरन निर्लज्ज पक्षपात भी था। तीन वर्षों में वितरित कुल 49.5 लाख रुपए के अनुदान में से श्री गांधी के प्रांत गुजरात को 26.25 लाख रुपए और शेष भारत को 23 लाख रुपए दिए गए। इसका अर्थ यह हुआ कि 29.50 लाख की आबादी वाले प्रदेश को 26.25 लाख तथा शेष भारत को, जिसकी आबादी 23 करोड़ थी, 23 लाख रुपए दिए गए।

इस पर न कोई प्रतिबंध था, न कोई नियंत्रण। यह जानने की कोई जरूरत नहीं समझी गई कि अनुदान किस उद्देश्य के लिए स्वीकृत किया गया और यह धन किसे दिया गया। कृपया निम्नलिखित तालिका पर ध्यान दें µ

तालिका-4

किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए विनियोजन किए बिना धन विनियोजन किए बिना और आबंटित किया गया किंतु व्यक्ति गारंटी के बिना धन का विशेष के नियंत्रणाधीन रखा गया। आबंटन किया गया।

(रुपए) (रुपए) मौलवी बदरूल हसन - 40,000 गुजरात - 3,00,000 श्री टी. प्रकाशम - 7,000 गुजरात - 18,00,000 सी. राजगोपालाचारी - 1,000 गुजरात - 3,00,000 बरजाज - 20,000

श्री गांधी - 1,00,000