3. तुच्छ चालें - Page 60

अध्यायः 3

तुच्छ चालें

कांग्रेस द्वारा अपने अधिकार त्यागने से इंकार

I

भारत सरकार के अधिनियम, 1919 में एक प्रावधान के अन्तर्गत यह अनिवार्य कर दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार 10 वर्ष की अवधि समाप्त होने पर, संविधान की कार्यप्रणाली की जांच करने के लिए, एक रॉयल कमीशन नियुक्त करेगी, जो संविधान में आवश्यक समझे जाने वाले संशोधनों के लिए भी अपनी रिपोर्ट देगा। इस प्रकार 1928 में सर जॉन साईमन की अध्यक्षता में रायल कमीशन नियुक्त किया गया। भारतीयों को आशा थी कि कमीशन में उन्हें भी सम्मिलित किया जाएगा परंतु लॉर्ड बर्किनहेड ने, जो उस समय भारत के राज्य सचिव थे, कमीशन में भारतीयों के सम्मिलित किए जाने का विरोध किया और उसे पूर्णतया संसदीय आयोग (पार्लियामेंटरी कमीशन) बनाने पर बल दिया। उस पर कांग्रेस तथा उदारपंथियों ने इसे अपना अपमान समझकर उसका विरोध किया। उन्होंने एक बड़ा आंदोलन चलाकर कमीशन का बहिष्कार किया। विरोध की उस भावना को शांत करने के लिए ब्रिटिश सरकार को यह घोषणा करनी पड़ी कि कमीशन का कार्य पूरा हो जाने के बाद भारत के लिए संविधान लागू करने से पहले भारतीय प्रतिनिधियों को विचार-विमर्श के लिए बुलाया जाएगा। इस घोषण के अनुसार संसद के प्रतिनिधियों तथा ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए लंदन में एक गोलमेज सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधियों को बुलाया गया।

12 नवंबर, 1930 को स्वर्गीय सम्राट जॉर्ज पंचम ने भारतीय गोलमेज सम्मेलन का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। उस गोलमेज सम्मेलन का महत्व इस बात से है कि इसमें ब्रिटिश सरकार ने भारत के लिए संविधान निर्माण में भारतीयों से परामर्श करने के लिए उनके अधिकार को मान्यता दी। अस्पृश्यों के लिए इतिहास में यह