46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बात महत्वपूर्ण घटना थी। यह पहला अवसर था, जब अस्पृश्यों को इसमें अपने दो प्रतिनिधि अलग से भेजने की अनुमति मिली, जिनमें एक मैं तथा दूसरे दीवान बहादुर आर. श्रीनिवासन थे। इसका अर्थ यह था कि अस्पृश्यों का हिंदुओं से अलग अस्तित्व ही नहीं है, बल्कि वे इतना महत्व रखते हैं कि भारत के लिए संविधान बनाने में भी उन्हें अपनी राय देने का अधिकार है।
इस गोलमेज सम्मेलन का कार्य नौ समितियों में विभाजित थां उसमें से एक अल्पसंख्यक समिति (माइनॉरिटीज कमेटी) थी, जिसे सांप्रदायिक प्रश्नों का हल निकालने का अत्यंत कठिन कार्य सौपा गया था। महत्वपूर्ण समिति होने के कारण, तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय रेमसे मैक्डोनाल्ड स्वयं उसके अध्यक्ष बने। अल्पसंख्यक समिति के सभी कार्य अस्पृश्यों के लिए बड़ा महत्व रखते हैं, क्योंकि उसमें कांग्रेस तथा अस्पृश्यों के मध्य जो बात घटित हुई और दोनों के बीच जो कटुता आई, वह समिति के कार्यवाही वृत्तान्त से प्राप्त हो जाएगी।
जब गोलमेज सम्मेलन की बैठक हुई, तब अस्पृश्यों की मांगों के अतिरिक्त अन्य सभी संप्रदायों की राजनीतिक मांगें सबको ज्ञात थीं। वास्तव में 1919 के संविधान में अस्पृश्यों को सांविधिक अल्पसंख्यक माना गया था और उनकी मांगों के लिए संरक्षण एवं सुरक्षा का प्रावधान किया गया था। अब उन प्रावधानों को और विस्तृत करने तथा उनकी रूपरेखा में परिवर्तन करने का प्रश्न था। जहां तक दलित वर्गों (डिप्रेस्ड क्लासेस) का प्रश्न था, उनकी स्थिति बिल्कुल भिन्न थी। मान्टेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट में, जिस पर 1919 का भारत सरकार का अधिनियम आधारित था, बिल्कुल स्पष्ट रूप से कहा गया था कि संविधान में अस्पृश्यों की सुरक्षा का प्रावधान अवश्य किया जाए। परंतु दुर्भाग्यवश जब संविधान का मसविदा तैयार किया गया तब संविधान में भारत सरकार को विधानसभाओं में नामजदगी से नाममात्र का प्रतिनिधित्व देने में बड़ी कठिनाई हुई। पहली बात यह थी कि हिदुंओं द्वारा अस्पृश्यों पर, जो अमानवीय अत्याचार हो रहे थे, उनसे उनकी सुरक्षा करने के लिए प्रावधान करना नितांत आवश्यक था। गोलमेज सम्मेलन की अल्पसंख्यक समिति में एक ज्ञापन देकर मैंने उस कार्य को पूरा किया। उनकी सुरक्षा के लिए मैंने जो ज्ञापन दिया था मैं उसका पाठ प्रस्तुत कर रहा हूंःµ
फ्स्वायत्तशासी भारत के सभी संविधान में दलित वर्गों के राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था - जिसे भारत के गोलमेज सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया।य्
स्वायत्तशासी भारत में बहुमत वाले शासन में शामिल होने के लिए दलित वर्ग निम्नलिखित शर्तों पर अपनी सहमति देंगेःµ