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अछूतों की राजनीतिक मांगें 7

रहेंगे और उनके जीवनयापन का कोई साधन नहीं होगा उनकी हिन्दुओं की संख्या कम होगी तब तक वे अछूते बने रहेंगे और हिंदुओं के अत्याचारों के शिकार होते रहेंगे और निर्भय होकर नहीं जी सकेंगे।

(ख) हिंदुओं के अत्याचारों से अनुसूचित जातियों को संरक्षण दिया जाए,

क्योंकि स्वराज, हिंदू राज के अतिरिक्त कुछ नहीं होगा तथा हालात और

भी बदतर हो जाएंगे।

(ग) कि अनुसूचित जातियों के संपूर्ण विकास के लिए, उन्हें आर्थिक और

सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए और अस्पृश्यता निवारण का मार्ग प्रशस्त

किया जाए।

काफी परिपक्व विचार-विमर्श के बाद यह सम्मेलन इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि भारत में मौजूद ग्राम्य व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन किए जाएं जो सदियों से हिंदुओं द्वारा पैदा की गई अनुसूचित जातियों की सभी मुसीबतों की जड़ हैं। इन परिवर्तनों की आवश्यकता को देखते हुए यह सम्मेलन समझता है कि सरकार की प्रणाली में संवैधानिक परिवर्तन किए जाएं और मौजूदा ग्राम व्यवस्था में परिवर्तन किए जाएं जिनका निम्नांकित आधार हो-

(1) संविधान में अनुसूचित जातियों की वर्तमान बस्तियों को स्थानांतरित किया

जाए, पृथक अनुसूचित जाति गांव बसाए जाएं, जो हिंदुओं के गांवों से

दूर और स्वतंत्र हों।

(2) अनुसूचित जातियों के नए गांवों के लिए आवास आयोग की स्थापना

की जाए।

(3) कृषि योग्य भूमि पर किसी का कब्जा नहीं है, आयोग को दे दी जाय,

जो अनुसूचित जातियों की नई बस्तियों को बसाने के काम में लाई

जाय।

(4) अनुसूचित जातियों के अवास की योजना के लिए आयोग को अधिकर

दिया जाएं कि वह भूमि अभ्यप्ति कानून के अनुसार निजी मालिकों से

जमीन खरीद सके।

(5) संविधान में व्यवस्था की जाए कि केन्द्र सरकार आवास योग को प्रतिवर्ष

पांच करोड़ रुपये दे, जिससे आयोग अपना कार्य संपन्न कर सके।