6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रस्ताव संख्या-3
नए संविधान में अनिवार्य प्रावधान
‘‘सह सम्मेलन मांग करता है कि अनुसूचित जातियों में सुरक्षा की भावना उत्पन्न करने के लिए संविधान में निम्नांकित प्रावधान किए जाएंः-
(1) प्रत्येक प्रांतीय सरकार द्वारा सहमति के आधार पर अनुसूचित जातियों में
प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए वार्षिक धनराशि
निश्चित की जाए और यह राशि प्रांतीय राजस्व से प्राथमिकता के आधार
पर निकाली जाए।
(2) ऐसे कानून बनाए जाएं कि केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों के प्रशासनिक पदों
को आरक्षित किया जाए जिनका अनुपात उनकी संख्या, आवश्यकताओं
और महत्व के अनुरूप हो।
(3) ऐसे कानूनी प्रावधान किए जाएं कि सरकारी सेवाओं में अनुसूचित
जातियों की जनसंख्या के अनुसार उनके स्थान आरक्षित किए जाएं, जो
उनकी आवश्यकताओं और महत्व के अनुरूप हों। सम्मेलन इस बात
पर भी बल देता है कि संरक्षित सेवाओं जैसे न्यायपालिका, पुलिस और
अनुसूचित जातियों के राजस्व का कार्यों के लिए न्यूनतम निर्धारित योग्यता
के आधार पर 10 वर्ष के अंदर नियुक्तियों का प्रावधान किया जाए। (4) अनुसूचित जातियों को सभी विधायिकाओं और स्वायत्तशासी संस्थाओं
में उनकी जनसंख्या, आवश्यकताओं और महत्व के अनुरूप प्रतिनिधित्व
की गारंटी का प्रावधान हो।
(5) यह कानूनी प्रावधान किया जाए कि जहां विधायिकाओं और स्वायत्तशाली
संस्थाओं में अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाए, उसका आधार
पृथक मतदान हो।
(6) यह कानूनी प्रावधान हो कि अनुसूचित जातियों के लिए सभी केन्द्रीय
और प्रांतीय लोक सेवा आयोगों में प्रतिनिधित्व दिया जाए।
प्रस्ताव संख्या-4
पृथक बस्तियां
सम्मेलन की यह सुविचारित राय है,
(क) जब तक अनुसूचित जातियों के लोग हिंदू गांवों के एक छोर पर बसते