अध्याय-4
हिंदुओं का विरोध
इन मांगों के लिए जो प्रस्ताव रखे गए वे तीन श्रेणियों में थेः
(1) राजनीतिक, (2) शैक्षिक, और (3) आर्थिक और सामाजिक।
राजनीतिक मांगों के अधीन तीन सुरक्षाएं मांगी गईः-
(1) व्यवस्थापिकाओं में प्रतिनिधित्व केवल व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व न हो,
बल्कि हिंदुओं और अनुसूचित जातियों का अलग-अलग प्रतिनिधित्व
हो।
(2) कार्यपालिका का दायित्व केवल व्यवस्थापिका के प्रति न हो, जिसका
अर्थ है केवल हिंदू के प्रति बल्कि वह हिंदू और अछूत दोनों के प्रति
उत्तरदायी हो।
(3) प्रशासन केवल सक्षम ही न हो, बल्कि सब वर्गों के प्रति, अछूतों के
प्रति भी विश्वसनीय हो और उसमें अछूतों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो
उनके पास प्रमुख पद हों, ताकि अछूतों को इसमें विश्वास हो।
राजनीतिक मांगों पर हिंदुओं और अछूतों में बहुत विवाद है। अछूतों के मित्र श्री गांधी ने उनकी मांगें स्वीकार करने के बजाय आमरण अनशन रखना बेहतर समझा, हालांकि वे राह पर आ गए, लेकिन यह नहीं पचा पाए कि इन मांगों के पीछे कितना न्याय है। यदि इस स्थान पर मैं यह बताऊं तो उचित रहेगा कि हिंदू अथवा कांग्रेस की प्रतिनिधि सरकार की क्या योजना हैः-
(1) भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रें से उम्मीदवार चुने जाएंगे।
(2) कार्यपालिका के सदस्य मात्र व्यवस्थापिका के बहुमत दल से ही रखे
जाएंगे।
(3) प्रशासन केवल कर्मचारियों की क्षमता के आधार पर चलाया जाएगा।
हिंदुओं ने अपनी योजना को राष्ट्रीय योजना कहा और अछूतों की योजना