5. संयुक्त बनाम पृथक मतदान - Page 32

संयुक्त बनाम पृथक मतदान 15

हिन्दुओं को यह अधिकार होगा कि वे अछूतों का नाममात्र का प्रतिनिधि नामजद कर देंगे, परन्तु असल में वह हिंदुओं की कठपुतली होगा। वह समझ में आ जाएगा कि हिंदुओं द्वारा तथाकथित सामुदायिक योजना का विरोधा और तथाकथित राष्ट्रीय योजना की वकालत न सैद्धांतिक है और न राष्ट्र के लिए संघर्ष। इसमें उनके अपने हित हैं। वे अखण्ड राजनीतिका सत्ता के लिए लड़ रहे हैं। उनका पहला मोर्चा इसलिए है कि किसी को हिस्सा ने मिले जैसा कि अविभाजित हिंदू परिवार में कर्ता सारे लाभ समेटे रहता है। इसी कारण वे भौगोलिक निर्वाचन-क्षेत्र पर अड़े हैं। इस मोर्चे पर असफल हो जाने पर उन्होंने दूसरा मोर्चा खोल लिया। वह चाहते हैं कि यदि सत्ता क्षेत्र में उसे कुछ झुकना भी पड़े तो नियंत्रण उन्हीं के हाथों में रहे। यह तभी हो सकता है जब संयुक्त मतदान हो और पृथक मतदान को रद्द कर दिया जाए। इसी कारण हिंदू पृथक मतदान पर एतराज करते हैं और संयुक्त पर जोर देते हैं।

तथाकथित राष्ट्रीय योजना का उद्देश्य चाहे सांप्रदायिक न कहलाए परंतु निस्संदेह इसका परिणाम यही होगा।