5. संयुक्त बनाम पृथक मतदान - Page 31

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जो तार्किक धरातल पर टिका है। आप धरातल को स्वीकार करके परिणाम को कैसे नकार सकते हैं? अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए विशेष पद्धति अपनाई जाती है। अछूतों जैसे अल्पसंख्यकों को यह अनुमति क्यों न हो कि वे यह निर्णय कर सकें कि उनके संरक्षण की क्या व्यवस्था हो। यदि अछूत पृथक मतदानका निश्चय करते हैं तो उनकी इच्छा स्वीकार क्यों न की जाए? ये कुछ ऐसे प्रश्न है, जिनका हिंदू उत्तर नहीं दे सकते। कारण यह है कि हिंदुओं के पृथक मतदान पर वास्तविक आपत्ति राष्ट्र के नाम उठाई गई आपत्ति से बिल्कुल भिन्न है। वास्तविक आपत्ति इस कारण है कि पृथक मतदान से वह अछूतों के लिए आरक्षित सीटें हड़प नहीं सकेंगे। दूसरी ओर संयुक्त मतदान यह अवसर प्रदान करेगा। मैं कुछ उदाहरणों से यह बताना चाहता हूं कि किसी निर्वाचन क्षेत्र में संयुक्त और पृथक मतदान किस प्रकार चलेगा। मद्रास प्रसीडेंसी के निम्नलिखित निर्वाचन-क्षेत्र को लें।

स. निर्वाचन क्षेत्र हिन्दुओं की अछूतों के कुल हिंदू कुछ अछूत हिंदू और

का नाम कुछ सीटें लिए मतदाता मतदाता अछूत वोटों

निर्धारित का

सीटें अनुपात

  1. मद्रास शहर 2 1 40,626 2,577 16 प्र.श.

दक्षिण

  1. चिक्काकोल 2 1 83,456 5,125 16,,,
  2. विजयनगरम 2 1 47,594 996 49,,,
  3. अमलाथुरम 1 1 52,805 7,760 7,,,
  4. एल्लोर 1 1 51,795 5,515 9,,,
  5. बंदार 1 1 84,191 8,723 10,,,
  6. तेनाली 1 1 1,32,107 5,732 24,,,

उपरोक्त तालिका में सात निर्वाचन-क्षेत्रों में दिए गए आंकड़ें मद्रास प्रेसीडेंसी से सहज रूप से लिए गए आंकडे दर्शनीय हैं। उपरोक्त आंकडों की समीक्षा से भली भांति समझ से आ जएगा कि यदि इन निर्वाचन क्षेत्रें में पृथक मतदान कराया जाए तो अछूत अना ऐसा प्रतिनिधि चुन सकते हैं, जिसमें उन्हें पूरा विश्वास हो और जो व्यवस्थापिका में अछूतों की तरह से हिंदुओं से लड़ाई लड़ सकते हैं। यदि दूसरी ओर इन निर्वाचन-क्षेत्रों में संयुक्त मतदान होगा तो अछूतों के प्रतिनिधि वास्तविक न होकर नाममात्र के होंगे, क्योंकि संयुक्त मतदान में अछूत प्रतिनिधि हिंदुओं का नामजद नहीं होगा, परिणामस्वरूप उनकी कठपुतली नहीं बनेगा, वहां 1ः 24 या 1ः 49 की स्थिति में उेस बहुत कम मत मिलेंगे। यह संयुक्त मतदान हिन्दुओं के फायदे के लिए होगा क्योंकि हिंदुओं के विचार से संयुक्त मतदान अछूतों के लिए भुतहा नगर होगा, क्योंकि