अध्याय-10
हिन्दुओं और उनके मित्रों से कुछ
प्रश्न
इस राजनैतिक विवाद में यह स्पष्ट हो जाता है कि हिंदू भिन्न-भिन्न संप्रदायों के साथ भिन्न-भिन्न बर्ताव करते हैं। भारत मे केवल अछूत ही अपने लिए सुरक्षा की मांग नहीं कर रहे हैं। अछूतों की तरह मुसलमानों और सिखों ने भी हिंदुओं के सामने अपनी मांग रखी हैं। किसी भी तरह यह नहीं कहा जा सकता कि मुसलमान और सिख निरीह अल्पसंख्यक हैं। इसके विपरीत वे भारत के अत्यंत शक्तिशाली समुदाय हैं। शैक्षिक दृष्टि से वे काफी विकसित हैं और आर्थिक दृष्टि से संपन्न हैं। उनकी सामाजिक हैसियत हिंदुओं की तरह काफी ऊंची है। उनके सुदृढ़ संगठन हैं और कोई हिंदू उन्हें तिरछी निगाह से देखने का दुस्साहस नहीं कर सकता। उन्हें बहुत कम हानि पहुंचाई जा सकती है।
मुसलमानों और सिखों की राजनीतिक मांग क्या हैं? उनका वर्णन करना इस समय संभव नहीं है। परंतु आम राय यह है कि वे काफी बेतुकी हैं और हिंदू उनके प्रति असंतुष्ट हैं। इसके विपरीत अछूतों की मांगें और शर्तें न्यायसंगत और मुसलमानों तथा सिखों की मांगों और शर्तों से भिन्न हैं। वे कमजोर निरीह और दीन-हीन अल्पसंख्यक हैं। वे सभी की कृपा पर निर्भर हैं और ऐसे कम अवसर नहीं आए हैं जब हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों ने मिल कर इनका विरोध न किया हो। सभी अल्पसंख्यकों में इन्हें सबसे अधिक संरक्षण और सुदृढ़ सुरक्षा की जरूरत है। इनकी मांगें मामूली सी हैं और उन्हें फालतू आश्वासन भी नहीं चाहिए, जैसा कि मुसलमान और सिख चाहते हैं। मुसलमानों, सिखों और अछूतों की मांगों पर हिंदुओं की क्या प्रतिक्रिया है? हालांकि मुसलमानों और सिखों की मांगें बेंतुकी हैं, परंतु हिंदु उन पर खास तौर से मुसलमानों से केवल संबंध ही सुधारना नहीं चाहते बल्कि उनके प्रति नरम भी हैं,