हिन्दुओं और उनके मित्रों से कुछ प्रश्न 35
के उद्देश्य घोषित करें, जिससे वे आश्वस्त हो सकें कि अंग्रेजी के विरूद्ध हिंदुओं का संघर्ष वास्तव में स्वतंत्रता संघर्ष है। कांग्रेस और हिंदू सवाल पूछने वाले विदेशी मित्रों को कांग्रेस के अल्पसंख्यक अधिकार संबंधी प्रस्ताव का हवाला देंगे। परन्तु मैं हिंदुओं के अमरीकी मित्रों को चेतावनी देना चाहता हूँ कि वे अल्पसंख्यकों को अधिकार देने संबंधी घोषणा की चकाचौंध पर न जाए। अल्पसंख्यकों के अधिकारों की घोषणा एक बात है और उन्हें लागू करना दूसरी और हिंदुओं के मित्र यदि वे सचमुच स्वतंत्रता प्रेमी हैं, तो वे सीधे परिपालन पर बल क्यों नहीं देते? क्या हिंदु यह नहीं कह रहे कि वे ब्रिटेन से स्वतंत्रता की मात्र घोषणा से संतुष्ट नहीं होंगे? क्या वे तुरंत परिपालन के लिए नहीं कह रहे? यदि वे ब्रिटेन से यह अपेक्षा करते हैं कि वे अपने युद्ध उद्देश्यों को लागू करें तो हिंदू अपने संघर्ष के उद्देश्य घोषित करने के लिए क्यों तैयार नहीं हैं? मुझे विश्वास है कि हिंदुओं के अमरकी मित्र हिंदुओं के इस प्रचार से गुमराह नहीं होंगे कि अंग्रेजों के खिलाफ हिंदुओं का यह संघर्ष स्वतंत्रता संघर्ष है। हिंदुओं की सहायता करने से पहले उन्हें स्वयं को संतुष्ट कर लेना चाहिए कि जो हिंदू यह आग्रह कर रहे हैं कि अंग्रेजों के खिलाफ उनका संघर्ष स्वतंत्रता के लिए संघर्ष है, वे ही कहीं अछूतों जैसे करोड़ों भारतीयों की स्वतंत्रता के शत्रु न बन जायें। यही दलील मैं भारत के 6 करोड़ अछूतों की ओर से दे रहा हूं और सबसे बड़ी बात यह है कि अमरीकी मित्र कहीं यह न सोच बैठें कि संविधान में संतुलन और नियंत्रण भारत की परिस्थितियों में निगरानी और नियंत्रण की मांग आवश्यक नहीं है क्योंकि संघर्ष जनसाधारण द्वारा चलाया जा रहा है और यह स्वतंत्रता के लिए है। लोकतंत्र और स्वतंत्रता प्रेमियों को यह नहीं भुलना चाहिए कि जान एडम्स ने क्या कहा है -
‘‘हमने जितना इतिहास अब तक पढ़ा है, साक्ष्य के लिए उन सबका संदर्भ
देना संभव नहीं है कि जब लोगों पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो वे अन्यायी,
अत्याचारी, उत्पीड़क, पाश्विक और क्रूर बन बैठे जैसे कोई राजा या नियंत्रणहीन
सत्ता प्राप्त सीनेट बन जाती हैः बहुसंख्यक सदा और बिना अपवाद के
अल्पसंख्यकों पर हावी हो गए है।’’
सभी बहुसंख्यकों पर संतुलन और नियंत्रण रखा जाए, यह हिंदुओं के बारे में कैसे हो सकता है?