नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 88

परिशिष्ट 71

परंतु क्या वह सिद्धांत मेहनतकश समुदाय के दृष्टिकाण से ठीक कहा जा सकता है? क्या श्रेष्ठ जर्मन व्यक्ति फ्रांसीसियों के लिए भी श्रेष्ठ हो सकता है? क्या तुर्क

V

(बम्बई सरकार के राजपत्र 1934 की अधिसूचना)

बम्बई सरकार दिसम्बर में निम्नांकित नियुक्तियां करेगी। विभिन्न नियुक्तियों के लिए प्रार्थी प्रत्येक पद के सामने लिखी जाति से सरकार के आदेश संख्या दिनांक 30 नवम्बर 1934 के अनुसार बारी-बारी से रखें जाएगें।

  1. मुख्य अभियंता सिंचाई सिंधः उत्तरी केनरा का कुनबी ।

  2. एलकिंस्टन कॉलेज बम्बई के लिए संस्कृत प्रवक्ताः सिंध का बलूची पहान।

  3. महामहिम के अंगरक्षको का कमान्डैंटः उत्तरी गुजरात का माखाड़ी ।

  4. सरकार का वास्तुकार परामर्शदाताः बादारी दक्षिण से खाना बदोंश ।

  5. इस्लामी संस्कृत निदेशकः करहदा ब्राह्मण।

  6. शरीरशास्त्र प्रवक्ता (ग्रांट मेडीकल कालिज) मुसलमान कसाई।

  7. यर्वदा जेल अधीक्षकः घंटीचोर

  8. मद्यनिषेद के दो आयोजकः धारला (भील खेड़ा)(पंच महल)

VI

(उच्च न्यायालय के एक मुकदमें की रिपोर्ट 1935)

क.ख. (जाति तेली) पर अपने सोते हुए पिता की निर्मम हत्या का आरोप था। न्यायाधीश ने अभियुक्त के विषय में सुनवाई की। जूरी ने उसे अपराधी ठहराया और अभियुक्त के वकील से कहा कि वह कुछ कहना चाहता है। वकील श्री बोमनजी ने कहा कि वह फैसले से सहमत है परंतु कानून के अनुसार अभियुक्त को किसी भी दशा में फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि इस साल सात मामलों में इन्हें सजा दी जा चुकी है इनसे दो तेलियों को पहले ही फांसी की सजा दी जा चुकी है और भारत के संविधान के अनुसार निर्धारित कोटे में से कई अन्य समुदायों का कोटा पूरा नही हुआ है, तेलियों का कोटा पूरा हो चुका है। विद्वान न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के वकील की दलील स्वीकार कर ली और अभियुक्त को बरी कर दिया।

VII

अन्नाजी रामचन्द्र (चितपावन ब्राह्मण) हाथ में लम्बा चाकू लिए पूना की गलियों में हर आने जाने वाले पर आक्रमण करते हुए पाया गाया । जब उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो पुलिस ने बताया कि वह हाल ही में पागलखाने से रिहा किया गया था। अपनी गवाही में पागलखाने के अस्पताल के अधीक्षक ने कहा कि अन्नाजी पिछले तीन वर्षो से अस्पताल में एक खतरनाक रोगी के रूप में रखा गया था। परंतु क्योंकि चितपावनों का निर्धारित कोटा है और अन्य समुदायों का कोटा अवधि पूरी नहीं हुई है इसलिए उसे आगे और नहीं रखा जा सकता था और चितपावनों के साथ रिआयत नहीं बरती जा सकती । इसलिए उसे सरकार के आदेश संख्या के अनुसार छोड़ दिया गया। मजिस्ट्रेट ने अन्नाजी की रिहाई के आदेश दे दिए।

VIII

(बम्बई प्रेसीडेंसी के जेल प्रशासन की 1937 की रिपोर्ट का सार-संक्षेप)

हर तरह की सावधानियां बरतने के बावजूद जेल के सदस्य प्रत्येक समुदाय के लिए निर्धारित कोटा पूरा नहीं कर

सके । उस अभाव को पूरा करने के लिए अधीक्षक ने सरकार से निर्देश भेजने का अनुराध किया है।