नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 87

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

योग्य व्यक्ति को और साधारण योग्यता के व्यक्ति की जगह बिल्कुल अयोग्य व्यक्ति को न लगा दिया जाए। परंतु ऐसा तर्क भारतीय इतिहास की घटनाओं पर दृष्टिपात करने से पूर्णतया निरर्थक सिद्ध होता है, क्योंकि भारतीय इतिहास के अनुसार जो योग्यतम व्यक्ति चुना जाता था वह शासक जातियों से ही संबंधित होता था। शासक जातियों के विचार से यह सिद्धांत बहुत ठीक था ।

भारत सरकार के लिए शाही आयोग की 1930 की रिपोर्ट

भारत में विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए गहराई से विचार किया गया है। पिछली जनगणना के आंकड़ो को ध्यान में रखकर उसके आधार पर हम सभी दावों पर मोटे तौर से ही लोगों को संतुष्ट कर सकते है क्योकि उस समय तक इस समस्या का सम्पूर्ण समाधान नहीं हो सकता जब तक की ऐसी सरकार का गठन न हो जाए जिसमें देश के प्रत्येक नागरिक को इसका सदस्य न बना दिया जाए क्योकि कई समुदायों का समान आधार नहीं है। हमने संविधान मे 2375 को मौलिक संख्या बताया है और अनेक समुदाय के भागों में उसे विभाजित कर दिया है जैसा कि संलग्न प्रतिवेदन पूर्व में उपलब्ध है। प्रत्येक समुदाय को उसके दावें के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जायेगा और देश में सारी नियुक्तियां, विभिन्न संस्थाओं की सदस्यता और दरअसल हर चीज का वितरण यथासंभव अनुसूची के अनुसार किया जायएगा। वाइसराय की कार्यकारी परिषद में 475 सदस्य होंगे जिनका निर्वाचन प्रत्येक समुदाय के सदस्यों के पांचवे भाग के हिसाब से किया जाएगा और तीन सदस्य एक-एक साल तक पद पर रहेंगे ताकि पांच वर्षो के दौरान प्रत्येक समुदाय को उसका सही अंश प्राप्त हो सके । प्रत्येक उच्च न्यायालय में 125 न्याधीश होंगे। प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल एक वर्ष होगा। हांलाकि इस व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक वर्ग को 19 साल के अंतराल पर अपना सही हिस्सा मिलेगा। सभी दावों से निबटने के लिए अन्य नियुक्तियां भी इसी आधार पर की जाएंगी।

II

भारत सरकार की अधिसूचना 1932

1931 के भारत सरकार अधिनियम के प्रावधान के अनुसार महामहिम सम्राट ने निम्नांकित 475 व्यक्तियों को गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद का सदस्य मनोनीत किया है।ः

267 मातादीन रामदीन (जाति नाई) आयुर्विज्ञान विभाग में शल्य चिकित्सा शाखा का प्रभारी सदस्य। 372 अल्ला बक्स पीरबक्स (मुसलमान ऊंटवान) सेना में ऊंट परिवहन प्रभाव का प्रभारी 433 रामास्वामी (जाति आन्ध्र भंगी) लोक सेवा निर्माण विभाग में सड़क स्वच्छता शाखा प्रभारी 437 जगन्नाथ भट्टाचार्य (कुलीन, ब्राह्मण, पुरोहित) पंजीकरण विभाग में घरेलू अनुभाग प्रभारी।

IV

(सभी स्थानीय सरकारों को पत्र 1934)

भारत सरकार की सहमति से विधान सभा द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुरूप मुझे यह कहने का आदेश हुआ है कि अबसे सरकार में प्रत्यक समुदाय के सदस्य को बारी बारी निक्युक किया जाए चाहे उम्मीदवार की योग्यता कुछ भी हों