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ऽभारत में विद्युत शक्ति का युद्धोत्तर विकास

डॉ. अम्बेडकर का भाषण

भारत में विद्युत शक्ति के युद्धोत्तर विकास से संबंधित समस्याओं पर उस पुनर्निर्माण नीति समिति द्वारा विचार-विमर्श किया गया जिसकी बैठक 25 अक्तूबर को नई दिल्ली में सम्पन्न हुई थी और भारत सरकार के श्रम सदस्य माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जिसके अध्यक्ष थे। प्रांतीय सरकारों, प्रमुख विद्युत शक्ति वाले राज्यों और इंजीनियरी हितार्थियों ने सरकार के निमंत्रण पर इस बैठक में भाग लिया।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने इस बैठक को संबोधित करते हुए कहाः

महानुभाव, मैं पुनर्निर्माण समिति संख्या 3ग की नीति-समिति की इस बैठक में आपका स्वागत करता हूं। अध्यक्ष पर प्रारंभिक भाषण करने का दायित्व भी है और यह उसका अधिकार भी है। मैं यह दायित्व स्वीकार करता हूं परंतु मैं एक लम्बा भाषण आप पर थोप कर उस विशेषाधिकार का दुरुपयोग नहीं करना चाहता। मेरा यह विचार है कि मैं कुछ संगत तथ्यों की ओर अपना ध्यान आकर्षित करूं ताकि हमारा ध्यान उन्हीं तथ्यों पर केंद्रित रहे।

आप में से जिन्हें भारत सरकार द्वारा पुनर्निर्माण की विभिन्न समस्याओं के अध्ययन के लिए गठित व्यवस्था तंत्र के बारे में मालूम नहीं है उन्हें मैं संक्षेप में इस कार्य योजना के बारे में बताना चाहूंगा जो अधिक अच्छे कार्य के लिए अपनाई गई है तथा परिषद की पुनर्निर्माण समिति द्वारा शीघ्रता से लागू किए जाने के लिए हाथ में ली गई है।

पांच समितियां

मुझे विश्वास है कि आपको यह ज्ञात होगा कि पूर्व वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने मार्च में परिषद की पुनर्निर्माण समिति बनाने का निर्णय लिया जिसके अध्यक्ष मेरे

इंडियन इन्फॉर्मेशन, 15 सितम्बर, 1943, पृष्ठ 279-81