118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जीवन पर विचार करते हुए बिजली से संबंधित समस्याओं का निराकरण कर लेंगे तथा इस हेतु केंद्र बनाम प्रांतीय सरकार के प्रतियोगी दावों का प्रश्न बीच में नहीं लाएंगे।
मैं निराशावाद पर अपनी बात का समापन नहीं चाहता यद्यपि अतीत में पुनर्निर्माण की स्मृति निराशाजनक रही है। युद्ध से पुनर्निर्माण की तात्कालिता उत्पन्न होती है ठीक जैसे कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है अथवा विपत्ति ईश्वर में विश्वास उत्पन्न करती है। विडंबना यह है कि युद्ध से उत्पन्न हुई यह उत्कंठा अब शांति में मृतप्राय सी लगती है। भारत में भी गत युद्ध के बाद भारतीय औद्योगिक आयोग और सैन्य सामग्री के भारतीय बोर्ड द्वारा प्रस्तावित पुनर्निर्माण की योजना के साथ यही हुआ। मेरा विश्वास है कि इस पर पुनर्निर्माण की योजना निष्क्रिय और समाप्त नहीं होने दी जाएगी। हमें इस युद्ध में वह आरोपित आंतरिक प्रेरणा मिली है जिससे विलियम जेम्स ने नाम दिया था, ‘‘प्रभावी यथार्थता की तीक्ष्ण भावना’’ जो कि भारत की गरीबी में झलकती है परंतु जो गत युद्ध के राजनीतिज्ञों के पास नहीं थी।
* * *
ऽअनुसूचित जातियों के विद्यार्थियों और
भारतीय शरणार्थियों के लिए सहायता
स्थायी वित्त समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव
अनुसूचित जातियों के उन विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियों का अनुदान जो वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विषयों में अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा युद्ध क्षेत्रों से आए भारतीय शरणार्थियों और वहां रोके गए व्यक्तियों के आश्रितों का व्यय वहन करना - ये दो महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं जिन्हें भारत सरकार के वित्त सदस्य माननीय सर जेरेमी रैसमैन की अध्यक्षता में 20 नवम्बर, 1943 को नई दिल्ली में आयोजित बैठक में स्थायी वित्त समिति ने अनुमोदित किया था।
प्रथम प्रस्ताव के अनुसार पांच वर्ष के तीन लाख रुपए के वार्षिक अनुदान की आवश्यकता होगी और बाद के प्रस्ताव से वर्ष 1944-45 में 225 लाख रुपए के व्यय किए जाने की आशा की जाती है।
ऽ इंडियन इन्फॉर्मेशन, 15 दिसम्बर, 1943, पृष्ठ 337