भारत में विद्युत शक्ति का युद्धोत्तर विकास
गिरावट शुरू हो गई है
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इसका परिणाम यह हुआ है कि एक दशक की समाप्ति होने तक हम जनसंख्या और उत्पादन के बीच एक नकारात्मक संतुलन में आ जाते हैं तथा रहन-सहन का स्तर बराबर गिरता जाता है। प्रत्येक दशक में जनसंख्या और उत्पादन के बीच का यह नकारात्मक संतुलन तीव्र गति से बढ़ रहा है और भारत को गरबी, अधिक गरीबी और चिरस्थायी गरीबी विरासत में मिल रही है। एक गिरावट शुरू हो गई है। मैं यह महसूस करता हूं कि इस गिरावट को कृषि-प्रदर्शनियों, पशु मेलों अथवा अच्छी खाद के प्रचार द्वारा नहीं रोका जा सकता। यह गिरावट उसी दशा में रोकी जा सकती है जब कृषि को लाभदायक बनाया जाए। भारत में कृषि को लाभदायक बनाने की संभावनाएं तभी बन सकती है जब औद्योगिकीकरण के पक्ष में गंभीर आंदोलन चलाया जाए। औद्योगिकीकरण ही एक ऐसा माध्यम है जिसमें कृषि पर भयंकर दबाव डालती हुई जनसंख्या को खपाया जा सकता है, जहां कृषेतर लाभकारी व्यवसायें में इस बढ़ती हुई जनसंख्या को काम पर लगाया जा सकता है।
संक्षेप में, जहां तक हमारे इरादे और उद्देश्य का संबंध है, हमारी पुनर्निर्माण समितियां निस्संदेह उस माडल पर बनाई गई हैं जो उन अधिकांश यूरोपीय देशों में अस्तित्व में आई हैं जिनके औद्योगिक ढांचे को जर्मनी ने नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था। पुनर्निर्माण की समस्याएं अलग-अलग होती है और ये समस्याएं एक देश से दूसरे देश में भिन्न होती हैं। कुछ देशों में पुनर्निर्माण की समस्या यह है कि पुराने संयंत्रों तथा उपकरणों को फिर से चुस्त-दुरुस्त किया जाए।
भारत में समस्या का रूप
कुछ देशों में पुनर्निर्माण की समस्या यह है कि उन उपकरणों और संयंत्रों को बदला जाए जो युद्ध में नष्ट कर दिए गए हैं। भारत में पुनर्निर्माण की समस्या में उन सभी प्रश्नों पर विचार किया जाना जरूरी है जिनसे अन्य युद्ध-रत देशों का सम्बन्ध है।
इसके साथ ही, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत में पुनर्निमार्ण की समस्या आवश्यक रूप से अन्य देशों की पुनर्निर्माण की समस्या से भिन्न है। उन देशों में पुनर्निर्माण की समस्या उन उद्योगों को फिर से चलाने की समस्या है जो अस्तित्व में रह रहे हैं।
मेरे विचार से भारत में पुनर्निर्माण की समस्या मुख्यतया भारत में औद्योगिकीकरण की समस्या है जो उद्योग के पुनर्जीवन तथा औद्योगिकीकरण से भिन्न है, परंतु जो अंततोगत्वा अनवरत गरीबी को हटाने की है।
अतः मुझे आशा है कि हम पूरी निष्ठा तथा कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में मानव