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कारखाना (संशोधन) विधेयक

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और व्यापारिक से सलाह नहीं ली है जो वास्तव में यह बताने में सक्षम हैं कि क्या इन संशोधनों की आवश्यकता है। मुझे इस बात की आशंका है कि धारा 19 में जो शर्तें रखी गई हैं इससे उन लोगों को और भी कठिनाइयां होंगी जिनके कारखाने हैं अथवा जिनका कारखाना लगाने का विचार है। मुझे इतनी ही परेशानी है। यदि मुझे यह समझा दिया जाए कि सरकार ने व्यावसायिक सलाह ले ली है और उद्योगपतियों की राय जान ली है तो मुझे इस प्रस्ताव का समर्थन करने में खुशी होगी।

माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडकरः श्रीमन्, मेरे माननीय मित्र श्री मुहम्मद नौमेन ने जो मुद्दे उठाए हैं उन पर मुझे कहना है कि यह विधेयक देश भर के कारखाना निरीक्षकों के सम्मेलन में की गई सिफारिशों के परिणामस्वरूप लाया गया है। उनका ही यह विचार है कि मौजूदा विधेयक में कुछ खामियां हैं सरकार ने तो केवल इतना किया है कि देश भर के कारखाना निरीक्षकों की सर्वसम्मत सिफारिशों को कार्यरूप दिया है। मुझे इस बात का पता नहीं है या मेरे पास कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जिससे पता चले कि देना चेंम्बर्स आफ कॉमर्स का कारखाना कानून से कुछ लेना नहीं है। परंतु मुझे विश्वास है कि मालिकों के संगठनों से सलाह-मशविरा किया गया है।

माननीय अध्यक्ष (सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह हैः-

‘‘कि कारखाना अधिनियम, 1934 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर

विचार किया जाए।’

श्री सी.सी. मिलर (बंगाल यूरोपियन)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः-

‘‘कि विधेयक के खंड 2 में उपधारा (1) के प्रस्तावित भाग (च) में निम्नलिखित शब्द जोड़े जाएंः

‘‘इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए’’।

श्रीमन्, मैं इस संशोधन का संक्षिप्त स्पष्टीकरण देना चाहता हूं। जैसा कि माननीय सदस्य ने पहले ही कहा है, मूल धारा 9 मेंं कुछ शीर्षों के अंतर्गत यह प्रावधान है कि कारखाना मालिकों को अमुख सूचना कारखाना निरीक्षकों को भेजनी चाहिए। कोई भी संदेह कर सकता है कि विधेयक की धारा 77 के संदर्भ में क्या इसमें किया जाना वाला संशोधन आवश्यक है क्योंकि इस धारा के अंतर्गत अतिरिक्त आवश्यक सूचना मांगी जा सकती है। परंतु यह मानकर कि सरकार का संशोधन सही है, हमने सोचा कि ऐसे संशोधन से हम कुछ विशिष्ट विषयों पर कुछ ज्यादा अपेक्षा कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि कारखाना निरीक्षक केवल वहीं सूचनाएं मांगे जो कारखाना अधिनियम में प्रासंगिक हों।