33. कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार - Page 193

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ऽकुशल श्रमिकों को युद्धापरांत रोजगार

‘‘देश के विकास की कोई योजना तब तक संपूर्ण नहीं कही जा सकती जब तक उसमें तकनीकी और वैज्ञानिक प्रशिक्षण की व्यवस्था न हो। यह मशीनी युग है और युद्धोपरांत इस संघर्णपूर्ण युग में वही देश जीवित रह सकता है और अपनी जनता का जीवन स्तर ऊपर उठा सकता है जिसमें तकनीकी और वैज्ञानिक प्रशिक्षण शिखर पर हो। भारत सरकार इस स्थिति से अनभिज्ञ नहीं है और वह यह देखेगी कि तकनीकी प्रशिक्षण योजना न केवल क्रियान्वित की जाए बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली का एक स्थायी अंग बन जाए।’’ ये विचार भारत सरकार के श्रम सचिव माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने 24 अगस्त को कलकत्ता में तकनीकी प्रशिक्षण योजना सलहाकार समिति को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस समिति का गठन केंद्र सरकार ने असैनिक उद्योगों की तकनीकी प्रशिक्षण योजनाओं की आवश्यकताओं पर विचार करने और समायोजन के लिए किया था। इसमें इंजीनियरिंग संघों के प्रतिनिधि और आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ कॉमर्स, आपूर्ति विभाग, रेलवे बोर्ड और इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियर्स के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक तीन दिन चली।

श्रम सदस्य का भाषण

श्रम सदस्य के भाषण का पूरा पाठ इस प्रकार हैः-

महानुभावो, आज आपका स्वागत करते हुए मैं आप सब को इस बैठक में उपस्थित होने का कष्ट करने के लिए आपको धन्यवाद देता हूं। आजकल सब अपने काम में इतने व्यस्त है कि उस काम में और बढ़ोतरी करने से हम पर भारी दबाव पड़ता है। मैं आपका आभारी हूं कि आपने देश की बढ़ती हुई तकनीकी प्रशिक्षण मांग के संदर्भ में सरकार की सहायता के लिए यह कष्ट उठाया।

मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं कि मैं इस समिति को कितना महत्व देता

ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 सितम्बर, 1944, पृष्ठ 274-77