33. कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार - Page 194

कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार

169

हूं। यद्यपि अंतिम क्षण में कुछ कठिनाइयां आ गई थीं, परंतु मैंने आपसे मिलने और आपको शुभकामनाएं देने कलकत्ता आने का निर्णय लिया और यह इस बात की गंभीरता का द्योतक है जो मैं आपसे कहने जा रहा हूं!

आप यहां हमारी तकनीकी प्रशिक्षण योजनाओं पर विचार करने के लिए एकत्र हुए हैं जो सेना की तकनीकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तात्कालिक उपाय के रूप में शुरू की गई थी और उसने भारत में अर्धकुशल श्रम शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि की है।

तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण कार्य के संबंध में आपको मैं अपने विचार बता रहा हूं। मैं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में आपको उसकी शुरूआत से अब तक की स्थिति के विषय में बताऊंगा। इसका आरंभ अब से साढ़े तीन साल पहले एक गंभीर बाधा का सामना करने के लिए किया गया था और वह थी सेना में भर्ती के लिए आवश्यकतानुसार तकनीकी कार्मिकों का अभाव। हमने एक साथ तीन हजार लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया। पर दो वर्षों के भीतर ही हमें यह संख्या 48,000 तक बढ़ा देनी पड़ी जिसके लिए 394 प्रशिक्षण केंद्रों की आवश्यकता थी। 1942 के अंत तक हमने 54,0000 प्रशिक्षित कार्मिकों की सेना को आपूर्ति की। जून, 1944 तक हमने 75,000 लोगों को प्रशिक्षित किया जिनमें से 63,000 ने रक्षा सेवाओं की तकनीकी शाखाओं में काम करना शुरू कर दिया। 3000 व्यक्ति आयुद्ध निर्माण फैक्ट्रियों में चले गए। मुझे विश्वास है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि इस अवधि के लिए यह कोई कम उपलब्धि नहीं है।

जैसाकि मैंने कहा, यह तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम सेना की आवश्यकताओं को देखते हुए शुरू किया गया था जो युद्ध के कारण बढ़ गई थी। अब युद्ध समाप्त होने को है और सेना में तकनीकी प्रशिक्षण की मांग घट जाएगी।

युद्ध की समाप्ति पर जो स्थिति उत्पन्न होगी उसको ध्यान में रखते हुए दो प्रश्न उत्पन्न होते हैं। पहला प्रश्न यह है कि प्रशिक्षित लोगों का क्या होगा जो सेना में भर्ती हो गए है। परंतु जिन्हें शीघ्र ही सेना से छुट्टी दे दी जाएगी और रोजगार की तलाश में रहेंगे? दूसरा प्रश्न यह है कि हम तकनीकी प्रशिक्षण योजना का क्या करें?

कुछ व्यक्तियों ने यह धारणा बना ली है कि सरकार ने तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम को समाप्त करेन का फैसला कर लिया है। यह बात बिल्कुल गलत है। यह सही है कि सरकार को कुछ प्रशिक्षण केंद्र बंद कर दिए हैं। हमारे यहां 170 प्रशिक्षण केंद्र हैं जिनकी क्षमता 32000 लोगों को प्रशिक्षित करने की है, जबकि 1942 में प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या 400 थी जिनकी क्षमता 45000 व्यक्तियों को प्रशिक्षण देने की थी।