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ऽश्रम संबंधी कानून में एकरूपता
(शुक्रवार, 7 अगस्त, 1942 को नई दिल्ली में हुए संयुक्त श्रम अधिवेशन में भारत सरकार के श्रम सदस्य की हैसियत से माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा दिए गए भाषण का हिन्दी रूपांतरण)
मुझे इस त्रिपक्षीय श्रम अधिवेशन के अवसर पर आपका स्वागत करते हुए बड़े हर्ष का अनुभव हो रहा है। आप लोगों ने हमारे निमंत्रण को जिस तत्परता से स्वीकार किया है और इस अवसर पर पधारने का कष्ट किया है उसके लिए मेरे और भारत सरकार के पास कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं हैं। मुझे आशा और विश्वास है कि आपकी इस भागीदारी के साथ-साथ इस अधिवेशन को सफल बनाने में भी आपका स्वेच्छापूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और आप इसके प्रयोजन को फलीभूत करेंगे।
मैं आपका अधिक समय नहीं लेना चाहता_ यह गंभीर आपात स्थिति के दिन हैं और मैं महसूस करता हूं कि आप में से प्रत्येक को यथासंभव शीघ्र अपने स्थान पर वापस पहुंच जाना चाहिए। इसलिए इस अवसर पर मैं लम्बा भाषण नहीं देना चाहता बल्कि कुछ ही मुद्दों को रखना चाहता हूं जिससे आपके समक्ष इस अधिवेशन का महत्व और उसके लक्ष्य तथा उद्देश्य को स्पष्ट कर सकूं।
दो विशेषताएं
जैसा कि आप जानते हैं, अब तक भारत सरकार के श्रम विभाग के तत्वाधान में नई दिल्ली में तीन श्रम-अधिवशन हो चुके हैं। इनमें से प्रथम 22 और 23 जनवरी, 1940 को, दूसरा 27 और 28 जनवरी, 1941 को और तीसरा 30 और 31 जनवरी, 1942 को हुआ था। इस श्रृंखला में वर्तमान अधिवेशन चौथा है। यदि मैं संक्षेप में इस अधिवेशन की विशेषताओं को आपके समक्ष रखूं, तो आप महसूस करेंगे कि
ऽ इंडियन इनफार्मेशन, सितम्बर 15, 1942