366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अभिग्रहीत भूमि के लिए मुआवजा
यह निर्णय किया गया कि जलाशायों के निर्माण के लिए अधिग्रहीत भूमि के लिए पूर्ण और सही मुआवजा अदा किया जाना चाहिए और यथासंभव यह मुआवजा भूमि के बदले में भूमि के रूप में दिया जाना चाहिए। प्रशासन का प्रभारी अधिकारी विस्थापित व्यक्तियों को नई भूमि पर बसाने के लिए ब्यौरेवार योजना तैयार करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन लोगों को जीविका का उतना ही अच्छा साधन मिल सके जो उन्हें अपनी मूल भूमि पर प्राप्त था।
सम्मेलन में इस बात पर सहमति हुई कि जांच-पड़ताल और सर्वेक्षण की लागत संबंधित केंद्रीय और प्रातींय सरकारों में विभाजित की जानी चाहिए तथा सामान्य सर्वेक्षण का कार्यभार केंद्रीय टेक्नीकल बिजली बोर्ड को सौंपा जाए और सिंचाई और नौवहन के मामले केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग के सुपुर्द किए जाएं।
ऽअनुसूचित जातियां और केंद्रीय सेवाएं
15 जून, 1946 के भारत सरकार के गजट में प्रकाशित एक संकल्प द्वारा भारत सरकार ने यह निर्णय किया है कि केंद्रीय सेवाओं में प्रत्यक्ष भर्ती द्वारा अनुसूचित जातियों के पक्ष में सेवाओं के आरक्षण को 8ऋ प्रतिशत से बढ़ाकर 12ऋ प्रतिशत कर दिया जाए ताकि यह जनसंख्या के अनुपात के अनुकूल हो सके।
11 अगस्त, 1943 के प्रस्ताव के पैरा 4 के नियम (1) और (2) में तदनुसार संशोधन कर दिया गया है जो इस प्रकार हैः-
‘‘(1) केंद्रीय सेवाओं में अखिल भारतीय आधार पर भारतीयों की प्रत्यक्ष भर्ती से भरे जाने वाले सभी रिक्त स्थानों के 12ऋ प्रतिशत स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे।’’
‘‘(2) ऐसी सेवाओं में जिनकी भर्ती स्थानीय क्षेत्रों अथवा सर्किलों के आधार पर की जाती है, और अखिल भारतीय आधार पर नहीं, अर्थात रेलवे, डाक और तार विभाग सीमा शुल्क सेवाएं, आयकर विभाग में अधीनस्थ पदों आदि अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के लिए कुल मिलाकर 12ऋ प्रतिशत रिक्त स्थान आरक्षित होंगे और यह अनुपात क्षेत्र अथवा सर्किल की अनुसूचित जातियों की जनसंख्या और संबंधित क्षेत्र अथवा सर्किल की प्रांतीय सरकार द्वारा अपनाए गए भर्ती के नियमों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।’’
ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 जुलाई, 1946, पृष्ठ 34