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ऽभारतीय बॉयलर्स (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य) महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि भारतीय बॉयलर्स अधिनियम, 1923 में आगे संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाएं।’’
यह विधेयक एक बहुत ही साधारण विधेयक है। यह एक विवाद-रहित विधेयक है और इसमें कोई सिद्धांत का मामला नहीं जुड़ा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, मेरा इस अधिनियम के प्रावधानों की कोई लंबी व्याख्या करने का नहीं है। यह बतलाना पर्याप्त होगा कि वह कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण सरकार को इस संशोधन विधेयक को लाने की आवश्यकता हुई। संक्षेप में वे परिस्थितियां ये हैं।
23 फरवरी, 1942 को बंबई की एक मिल में बॉयलर दुर्घटना हुई जिसके परिणामस्वरूप बहुत गंभीर जीवन हानि हुई। बंबई सरकार ने इस दुर्घटना के कारणों की खोज के लिए एक जांच समिति बिठाई। जांच के परिणामों से पता चला कि यह दुर्घटना ‘इकोनोमाइजर’ नामक यंत्र के विस्फोट के कारण हुई थी। इसको और अधिक स्पष्ट करते हुए बताया गया कि इस ‘इकोनोमाइजर’ की नलिकाएं जिन्हेंं तकनीकी भाषा में ‘पोषक नलिकाएं’ कहा जाता है क्षरण के कारण बहुत कमजोर हो गई थी। इस जांच के परिणामों को देखकर सरकार को आश्चर्य हुआ क्योंकि भारतीय बॉयलर अधिनियम, 1923 में बॉलयर निरीक्षक के लिए यह प्रावधान है कि वह नियमित रूप से बॉलयर का निरीक्षण करके यह प्रमाणपत्र दे कि बॉयलर्स सही चालू हालत में हैं। अब प्रश्न यह है कि बॉलयर निरीक्षक ने यह जानते हुए कि ‘इकोनोमाइजर’ की पोषक नलिकाएं काम करने लायक नहीं रहीं, किन हालात में इस प्रकार का प्रमाणपत्र दिया। जब नियमों की छानबीन की गई तो मालूम हुआ कि इंडियन बॉयलर्स एक्ट की धारा 28 के अनुसार बॉयलर निरीक्षक का यह कर्तव्य नहीं है कि वह बॉयलर की पोषक नलिकाओं या अन्य ऐसे दूसरे यंत्रों की जांच करे और यही वह कारण है
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 3, 29 जुलाई, 1943, पृष्ठ 176-77