70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि पोषक नलिकाओं की जांच नहीं की गई थी जिनके कारण वह घातक विस्फोट हुआ। इन कमियों को दूर करने के लिए ही यह संशोधन विधेयक लाया गया है।
प्रस्तुत विधेयक में दो संशोधन सुझाए गए हैं। पहला संशोधन तो धारा 2 में एक नया खंड (ग ग) शामिल करना है जो स्पष्टीकरण देने वाला उपखंड है। इसके द्वारा एक नई शब्दावली ‘पोषक नलिका’ जोड़ी गई है और यह परिभाषित करता है कि ‘पोषक नलिका’ क्या है। दूसरे संशोधन का संबंध जिसे ‘वाष्प नलिका’ कहा जाता है उसके कार्यक्षेत्र के विस्तार करने से है। आज की यथास्थिति के अनुसार, कानूनी तौर पर ‘वाष्प नलिका’ का तात्पर्य केवल मुख्य ‘वाष्प नलिका’ से है और इस संशोधन के पारित हो जाने के बाद सरकार के लिए धारा 28 के तहत निर्मित नियमों में संशोधन करना संभव हो सकेगा ताकि बॉयलर निरीक्षक पर वाष्प नली के अतिरिक्त पोषक नलिकाओं की जांच करने का अनिवार्य उत्तरदायित्व सौंपा जाए। यही कारण है कि यह विधेयक सदन में लाया गया है। मैं प्रस्ताव करता हूं कि इस विधेयक पर विचार किया जाए।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः
‘कि भारतीय बॉयलर्स अधिनियम, 1923 में आगे संशोधन करने वाले विधेयक
पर विचार किया जाए।’
श्री सी.सी. मिलर (बंगालः यूरोपीय) मैं केवल एक छोटे से मुद्दे पर माननीय सदस्य से प्रकाश डालने का अनुरोध करता हूं। इसका संबंध ‘पोषक नलिकाओं’ जिन्हें ‘इकोनोमाइजर’ कहा जाता है कि कार्य प्रणाली से है। यह बॉलयर का अभिन्न अंग न होकर एक सहायक अंग है और मैं समझता हूं कि नलिकाओं में खराबी होने पर भी बॉलयर निरीक्षक कानूनी तौर पर बॉयलर के सही दशा में होने का प्रमाणपत्र जारी करने से इंकार नहीं कर सकता। यदि मालिक उन पोषक नलिकाओं को निकाल देता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र यह मानेंगे कि मेरे लिए इस संबंध में सुनिश्चित उत्तर देना संभव नहीं है, लेकिन मुझे यह बताया गया है कि उनकी मान्यता बिल्कुल सही है जो उन्होंने कहा है।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह हैः
‘कि भारतीय बॉयलर्स अधिनियम, 1923 में आगे संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।