14. मोटर वाहन (चालक) संशोधन विधेयक - Page 97

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ऽमोटर वाहन (चालक) संशोधन विधेयक

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘कि मोटर वान (चालक) अध्यादेश, 1941 में संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’

यह एक साधारण विधेयक है। जैसा कि सदन को याद होगा, ऐसे अनेक अध्यादेश हैं जिनके माध्यम से सरकार ने अनेक लोगों की सेवाएं अधिग्रहीत की हैं।

एक माननीय सदस्यः कुल कितने लोगों की?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे पास यह सूचना नहीं है किन्तु मेरे विचार से यह तथ्य सर्वविदित है। यह भी एक अध्यादेश है जिसके द्वारा मोटर चालकों की सेवाएं मांगी गई हैं। अध्यादेश पारित होने के पश्चात पता चला था कि एक प्रावधान है जो एक अन्य अध्यादेश में है किन्तु मोटर चालक अध्यादेश में नहीं है। वह प्रावधान यह था कि अध्यादेश में ऐसा कुछ नहीं था जिससे प्राधिकरण द्वारा किसी मोटर चालक की सेवाएं अधिग्रहीत करने और बाद में उसे सेवा मुक्त कर देने के पश्चात मालिक पर उसको पुनः बहाल करने का दायित्व हो। इसी कमी को पूरा करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। इस संशोधन के तीन उद्देश्य हैं। संशोधन में अपेक्षा की गई है कि यदि कोई मोटर चालक, जिसकी सेवाएं सरकार ने अधिग्रहीत की थीं, सरकार द्वारा सेवा-मुक्त कर दिया जाए तो उसे पुनः नियोजित करना मालिक की जिम्मेवारी होगी। दूसरे, मालिक की इस जिम्मेवारी से उठे विवाद को सुलझाने का तरीका इसमें दिया गया है। इस बारे में यह उपबंध किया गया है कि ऐसा विवाद प्रांतीय सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा। तीसरे, प्राधिकरण के आदेशों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान किया गया है। विधेयक के अन्य प्रावधान मोटर चालकों को दिए गए रोजगार के अधिकारों की सीमा के

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 3, 29 जुलाई, 1943, पृष्ठ 178