मोटर वाहन (चालक) संशोधन विधेयक
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बारे में हैं, जो द्विमुखी हैं। प्रथम, मोटर चालक को रोजगार मांगने से पूर्व लगातार 6 माह तक कार्यरत रहना होगा। दूसरा, राष्ट्रीय सेवा से अलग होने के बाद दो माह के भीतर पुनः रोजगार के लिए दरख्वास्त करनी चाहिए। इन शर्तों के पूरा होने पर, प्रस्तुत विधेयक उसे उन लोगों की बराबरी के स्तर पर लाता है जिनकी सेवाएं अधिग्रहीत की गई थीं। अब मुझे इस विधेयक के संबंध में और कुछ नहीं कहना। महोदय, इन टिप्पणियों के साथ मैं प्रस्ताव पेश करता हूं!
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह हैः
‘कि मोटर वाहन (चालक) अध्यादेश, 1942 में संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः खंड 2
ऽसर कावसजी जहांगीर (बंबई शहरः मुस्लिम शहरी)ः श्रीमान्, खंड 2 इस विधेयक का मुख्य खंड है। इस विधेयक के लाए जाने का प्रयोजन उन मोटर वाहन चालकों को रोजगार मुहैया कराना है जिनकी सेवाएं सरकार ने युद्ध प्रयासों के दौरान अधिग्रहीत कर ली थीं। इसके द्वारा यह प्रयत्न किया जा रहा है कि, यदि वह मोटर वाहन चालक अपने पूर्ववर्ती नियोजक की नौकरी में लगातार छह मास तक रहा हो और दो मास के भीतर फिर उसकी नौकरी के लिए अर्जी दे दे, तो उस नियोजक को दो शर्तों के अंतर्गत उक्त मोटर चालक को पुनः नौकरी पर लेना होगा ....। यदि माननीय श्रम सदस्य इन मुद्दों पर विचार करें तो इसके लिए वह समय ले सकते हैं। मैं समझता हूं कि वह जनता और इस सदन के प्रति सही दृष्टिकोण अपनाएंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र सर कावसजी जहांगीर ने जो विचार व्यक्त किए हैं उनसे एक बहुत बड़ी काली तस्वीर इस मुद्दे पर उभरी है कि यदि पूर्ववर्ती नियोजक अपने पहले वाले मोटर वाहन चालक को बहाल करने से इन्कार कर दे तो क्या कुछ हो सकता है। लगता है कि वह यह समझ रहे हैं कि इस मुद्दे पर एक बार विवाद उठ जाए तो यह बहुत लम्बे अरसे तक चलता रहेगा। किन्तु मुझे विश्वास है कि यह बहुत कम समय में समाप्त हो जाएगा। हमने उपबंध किया है कि सरकार एक प्राधिकरण नियुक्त करेगी और मुझे तनिक भी शंका नहीं है कि यह प्राधिकरण दोनों पक्षों को मंजूर होगा।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 3, 29 जुलाई, 1943, पृष्ठ 179-80