ऽक्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत की अनुसूचित
जातियों (अछूतों) का प्रतिनिधित्व करती है?
इस वर्ष के प्रारंभ में श्रमिक सरकार (लेबर गवर्नमेंट) ने भारत में राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए जो मंत्रिमंडल शिष्टमंडल (केबिनेट मिशन)भेजा, उसने एक संविधान सभा द्वारा संविधान का निर्माण करने के लिए एक योजना प्रस्तुत की। इस संविधान सभा में ऐसे प्रतिनिधि होंगे जिनका चुनाव प्रांतीय विधायिकाओं के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मतदान द्वारा किया जाएगा। संविधान सभा के गठन के लिए मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल की योजना ने प्रांतीय विधायिकाओं के सदस्यों को तीन वर्गों में विभक्त किया हैः 1. मुस्लिम, 2. सिख और 3. सामान्य। इनमें से प्रत्येक के लिए सीटों का कोटा निर्धारित किया गया है। प्रत्येक वर्ग का एक अलग निर्वाचन-मंडल होगा जिससे संविधान सभा के मुस्लिम प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधायिका के मुस्लिम सदस्यों द्वारा किया जाएगा, सिख प्रतिनिधियों को सिख सदस्यों द्वारा और सामान्य वर्ग के सदस्यों को शेष सभी सदस्यों द्वारा चुना जाएगा। ‘सामान्य वर्ग’ में
हिन्दू 2. अनुसूचित जातियां 3. भारतीय ईसाई तथा 4. एंग्लो-इंडियन शामिल हैं।
भारत की अनुसूचित जातियों को यह देखकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि उनको हिन्दुओं के साथ मिला दिया गया है। महामहिम की सरकार द्वारा कई बार यह घोषणा की गई है कि महामहिम की सरकार यह मानती है कि अनुसूचित जातियां भारत के राष्ट्रीय जीवन में पृथक घटक हैं और यह कि महामहिम की सरकार ऐसा कोई संविधान नहीं लायेगी/थोपेगी जिसमें अनुसूचित जातियां एक इच्छुक पक्ष नहीं होंगी। यह प्रश्न पूछा जाता है कि मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल (कैबिनेट मिशन) ने मुस्लिमों तथा सिखों को पृथक घटक क्यों माना है और उसने अनुसूचित जातियों को वही हैसियत देने से इंकार क्यों किया है?
ऽ स्रोतः मुद्रित पुस्तिका