148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
करने की बात है। संसद में सुरक्षा की शुरूआत करने का कोई लाभ नहीं है, यदि इन सुरक्षाओं को भारतीय विधायिका द्वारा नष्ट किया जा सकता हो। ऐसी कार्यवाही के विरूद्ध एकमात्र रक्षोपाय यह आश्वस्त करना है कि संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान में ऐसे अनुच्छेद हों जो भारतीय विधायिका की सांविधिक शक्तियों पर सीमा व प्रतिबंध लगाते हों और अल्पसंख्यक रक्षोपायों में परिवर्तन करने से पहले पूरी की जाने वाली पूर्ववर्ती शर्तों को निर्धारित करते हों। ऐसी व्यवस्था व प्रावधान संयुक्त राज्य अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया के संविधान में विद्यमान हैं।
(ख) यद्यपि यह अल्पसंख्यकों के लिए अत्यावश्यक महत्व का मामला है, फिर भी मंत्रिमंडलीय आयोग ने इस विषय पर कोई विचार नहीं किया है। महामहिम की सरकार इस प्रश्न के संबंध में क्या करेगी इस बात को बताने के लिए इस पर दबाव डालना आवश्यक है।
-बी.आर. अम्बेडकर