2. मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल तथा अछूत - Page 162

प्रस्तावों की समीक्षा

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( ii ) यह घोषण करने के लिए दबाव डाला जाए कि क्या महामहिम की सरकार एक व्यवस्था तंत्र स्थापित करेगी_ यदि हां तो किस किस्म का जो इस बात की जांच करे कि क्या संविधान सभा द्वारा निर्मित अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षाएं पर्याप्त तथा वास्तविक हैं या नहीं।

(क) दिनांक 25 मई, 1946 के अपने पूरक विवरण (बयान) (पत्राचार 6835) में मंत्रिमंडलीय आयोग यह कहता हैः-

‘‘जब संविधान सभा अपना श्रम पूरा कर लेगी, महामहिम की सरकार संसद से ऐसे कार्यवाही की सिफारिश करेगी जो भारत की जनता की प्रभुसत्ता के लिए आवश्यक हो, परंतु केवल दो मामलों के अधीन, जिनका उल्लेख वक्तव्य में है और जिनके विषय में हमारा विश्वास है कि विवादास्पद नहीं हैं, अर्थात, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था (वक्तव्य का पैरा 20) तथा सत्ता-हस्तांतरण से उत्पन्न मामलों को शामिल करने के लिए महामहिम की सरकार के साथ संधि करने की इच्छा (वक्तव्य का पैरा 22)’’

इस पैरा के पीछे का विचार बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। महामहिम की सरकार पर इस बात को स्पष्ट करने के लिए दबाव डाला जाए कि उनकी मंशा क्या है।?

(ख) यदि ‘‘मामलों के अधीन’’ शब्दों का अर्थ यह है कि महामहिम की सरकार अपने पास यह अधिकार रखती है कि संविधान सभा द्वारा निर्मित अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षाओं की वह जांच करने का अधिकार रखती है ताकि यह पता चल सके कि क्या वे पर्याप्त तथा वास्तविक हैं, तो महामहिम की सरकार पर यह दबाव देना आवश्यक है कि वह यह बताए कि ऐसी जांच के लिए उसका क्या तंत्र बनाने का प्रस्ताव है। अल्पसंख्यक समुदायों से साक्षियों की जांच करने के लिए एक शक्ति सम्पन्न संयुक्त संसदीय समिति का तंत्र सबसे उपयुक्त होगा। इसके लिए एक पूर्वोदाहरण है। जब भारत सरकार अधिनियम 1935 बन रहा था तो एक संयुक्त संसदीय समिति नियुक्त की गई थी। संविधान सभा की रिपोर्ट पर कार्यवाही में पूर्वोदाहरण का अनुसरण करने में कोई गलती नहीं होगी।

( iii ) महामहिम की सरकार पर यह दबाव डाला जाए कि वह यह घोषणा करे कि क्या वह संविधान सभा द्वारा बनाए गए संविधान के लिए आग्रह करेगी जिसमें भावी भारतीय विधायिका द्वारा मात्र बहुमत से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को नष्ट करने की शक्ति को सीमित करने वाला अनुच्छेद हो।

(क) न तो 16 मई, 1946 के मंत्रिमंडलीय आयोग के प्रथम वक्तव्य में और न 25 मई, 1946 के पूरक विवरण में, स्वतंत्र भारत की विधायिका के विरूद्ध व्यवस्था करने, संविधान को बदलने तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से संबंधित अनुच्छेद को रद्द