भाग-1 अनुसूचित जातियों की शिकायतें - Page 19

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अनुसूचित जातियों की शिकायतें

इस ज्ञापन में ब्रिटिश इंडिया में रहने वाली अनुसूचित जातियों की शिकायतें दी गई हैं और उन उपायों का सुझाव दिया गया है जो उन शिकायतों को दूर करने के लिए आवश्यक हैं। मैंने इन शिकायतों की सूची बनाते समय ऐसी शिकायतों का उल्लेख किया है जो केवल केन्द्रीय सरकार द्वारा ही दूर की जा सकती है।

इस ज्ञापन में सूचीबद्ध शिकायतों को तीन वर्गों में बांटा गया है, अर्थात् (1) राजनीतिक (2) शैक्षिक (3) अन्य शिकायतें, और उन पर अलग-अलग विचार किया गया है। अध्याय 1 में राजनीतिक शिकायतें, अध्याय 2 में शैक्षिक शिकायतें और अध्याय 3 मेंं अन्य शिकायतें दी गई हैं। इसमें मैंने अध्याय 4 भी सम्मिलित किया है जिसमें मैंने उस कर्त्तव्य के बारे में बताने का साहस किया है जिसे प्रत्येक सरकार ऐसे लोगों के साथ निभाए जो अनवरत विपन्नता का जीवन बिता रहे हैं, और मुझे आशा है कि भारत सरकार इसको मान्यता देगी तथा वह काम करेगी जो उसे अनुसूचित जातियों के लिए करना चाहिए।

इस प्रकार यह ज्ञापन निम्नलिखित चार अध्यायों में विभाजित किया गया है- अध्याय 1 राजनीतिक शिकायतें

  1. केन्द्रीय विधान सभा में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व।

  2. केन्द्रीय कार्यपालिका में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व।

  3. लोक सेवाओं में प्रतिनिधित्व का अभाव।

  4. संघ लोक सेवा आयोग में प्रतिनिधित्व का अभाव।

अध्याय 2 शैक्षिक शिकायतें

  1. उच्च शिक्षा के लिए सहायता का अभाव।

  2. तकनीकी प्रशिक्षण के लिए सुविधाओं का अभाव।

अध्याय 3 अन्य शिकायतें

  1. प्रचार के मामले में लापरवाही ।

  2. सरकारी ठेकों में बंद द्वार।

अध्याय 4 विपन्न लोगों के प्रति सरकार का कर्त्तव्य