अध्यायः 1
राजनीतिक शिकायतें
1. केन्द्रीय विधान सभा में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व
इस समय गठित केन्द्रीय विधान सभा में 141 सदस्य हैं। इनमें से 102 सदस्यों का चुनाव किया गया है और 39 नामांकित हैं। नामांकित सदस्यों में से 19 सदस्य गैर-सरकारी और 20 सदस्य सरकारी हैं। इन कुल 141 सदस्यों में से अनुसूचित जातियों के केवल 2 सदस्य हैं। अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की तुलना में अनुसूचित जातियों के दो सदस्यों की बात पर विचार किया जाना चाहिए। भारत में जनगणना एक राजनीतिक विषय बन गया है और हिन्दुओं, मुसलमानों और सिक्खों ने जनगणना कराने में इस बात के प्रयास किए हैं कि वे गलत आंकड़े देकर अपनी जनसंख्या में वृद्धि दिखाएं। यह प्रयास अधिकांशतया अछूतों की उपेक्षा करके किया गया है, इसलिए कि उनकी जनसंख्या के सही आंकड़े मालूम करना कठिन है। जनसंख्या में जो कुछ भी अनुमान दिए गए हैं, वे कम हैं। फिर भी जनगणना के 4 करोड़ के आंकड़े को मानकर निस्संदेह यह कहा जा सकता है कि केन्द्रीय विधान सभा में अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व हास्यास्पद रूप से कम है। चार करोड़ का आंकड़ा 1940 की जनगणना रिपोर्ट में दिया गया है।
इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मैं पृष्ठ 2 और 3 पर दो तालिकाएं प्रस्तुत करता हूं जो इस प्रश्न से संबंधित हैं।
तालिका 2 उस प्रतिनिधित्व पर विशेष प्रकाश डालती है जो इस समय केन्द्रीय विधान सभा में अलग-अलग समुदायों का है। स्तंभ 5 में दिए गए आंकड़े प्रत्येक समुदाय का कुल प्रतिनिधित्व दर्शाते हैं तथा उनमें से कुछ के प्रतिशत के अनुपात भी दिखाए गए हैं। परन्तु मैं उनके बारे में अधिक नहीं कहना चाहता। उनमें नामाकित कर्मचारियों के आंकड़े सम्मिलित किए गए हैं। वे मुख्य रूप से सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन समुदायों का प्रतिनिधित्व नहीं करते जिनके वे अंग हैं। दूसरे, नामांकित कर्मचारियों के समूह का गठन परिवर्तनीय है और निर्धारित नहीं है। परंतु मैं अन्य स्तंभों में दिए गए आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मैं स्तंभ 6 से