28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
ऐसे पद केवल उन्ही उम्मीदवारों के लिए जाएंगे जिन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
कला और विधि के विषयों में शिक्षा अनुसूचित जातियों के लिए अधिक मूल्यवान नहीं हो सकती चाहे यह शिक्षा स्नातकों को दी जाए अथवा लोगों को। इस शिक्षा का मूल्य हिंदुओं के लिए भी अधिक नहीं है। अनुसूचित जातियों को विज्ञान तथा टैक्नॉलोजी में उन्नत प्रकार की शिक्षा अधिक सहायक होगी, परंतु यह स्पष्ट है कि विज्ञान और टैक्नॉलोजी में शिक्षा अनुसूचित जातियों के साधनों से परे है और यही कारण है कि अनेक लोग अपने बच्चों को कला और विधि के विषयों में अध्ययन करने के लिए भेजते हैं। सरकारी सहायता के बिना विज्ञान और टैक्नॉलोजी की उन्नत शिक्षा का क्षेत्र कभी भी अनुसूचित जातियों के लिए सुलभ नहीं होगा और यह केवल न्यायसंगत तथा उचित है कि केन्द्रीय सरकार इस संबंध में उनकी सहायता के लिए आगे आए।
इस समस्या का समाधान हो जाएगा यदि आगे दिए गए प्रस्ताव भारत सरकार द्व ारा स्वीकार कर लिए जाएंः-
(1) अनुसूचित जातियों के उन विद्यार्थियों को 2 लाख रूपये की
छात्रवृत्तियां प्रतिवर्ष दी जाएं जो विश्वविद्यालयों में विज्ञान और टैक्नॉलोजी
के पाठ्यक्रम में अथवा भारत के अन्य वैज्ञानिक और तकनीकी प्रशिक्षण
संस्थाओं में प्रवेश लें।
(2) अनुसूचित जातियों के विद्यार्थियों को विज्ञान और टैक्नॉलोजी की
शिक्षा के लिए इंग्लैंड, यूरोप, अमरीका और डॉमीनियन के विश्वविद्यालयों
में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्तियों पर एक लाख रूपये वार्षिक अनुदान
व्यय किया जाए।
- ऐसी कोई भी बात नहीं है जो भारत सरकार को इस उत्तरदायित्व के निभाने से रोक सके। यह सत्य है कि शिक्षा, जहां तक कानून बनाने का सम्बन्ध है, केन्द्रीय विषय नहीं है। फिर भी, भारत सरकार अधिनियम की धारा 150(2) में कहा गया है कि केन्द्रीय सरकार किसी भी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अनुदान दे सकती है चाहे वह उद्देश्य ऐसा उद्देश्य क्यों न हो जिसके संबंध में केन्द्रीय विधान सभा कानून बना सके। इस शक्ति का प्रयोग भारत सरकार द्वारा किया गया है ताकि शैक्षिक संस्थाओं की सहायता की जा सके। नीचे ऐसी शैक्षिक संस्थाओं की सूची दी गई है जो केन्द्र सरकार के प्रशासन क्षेत्र से बाहर हैं और जिन्हें केन्द्रीय राजस्व से सहायक अनुदान प्राप्त होते हैं।