2. शैक्षिक शिकायतें - Page 42

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अध्याय 2

शैक्षिक शिकायतें

1 उच्च शिक्षा के लिए सहायता का अभाव
  1. अनुसूचित जातियों के लड़कों में उच्च शिक्षा की प्रगति को देखा जाए तो ये निष्कर्ष निकलते हैंः

(1) कला और विधि के विषयों में शिक्षा संतोषजनक रूप से प्रगति

कर रही है।

(2) विज्ञान और इंजीनियरी में शिक्षा ने कोई प्रगति नहीं की है।

(3) विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा पहुंच से बाहर है।

  1. इस शोचनीय स्थिति के बारे में उचित रूप से विचार किया जाना चाहिए। लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों के प्रवेश के प्रश्न पर विचार-विमर्श करते समय यह तथ्य उभरा कि यह बात पूर्ण रूप से लोक सेवा अधिकारियों की सहानुभूति पर आश्रित है। यदि इसे सहानुभूतिपूर्ण बनाना है, तो देश के राष्ट्रीय जीवन के अलग-अलग तत्वों का इसमें प्रतिनिधित्व होना चाहिए और विशेषकर अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व अवश्य होना चाहिए इस कथन के साथ यह भी कहना होगा कि यदि अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व लिपिक वर्गीय पदों तक सीमित किया गया तो इसका कोई परिणाम नहीं निकलेगा चाहे कितने ही पद क्यों न हो और उन पदों को अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों को दिया जाए। यह बात इस दृष्टि से ठीक हो सकती है कि शिक्षित युवाओं को इससे जीविका उपलब्ध होती है। परंतु इसका प्रभाव अनुसूचित जातियों की दशा पर नहीं पड़ सकता। अनुसूचित जातियों की प्रतिष्ठा और दशा केवल उसी समय सुधरेगी जब अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों को लिपिक वर्ग की सेवाओं से हटकर कार्यकारी पदों पर नियुक्त किया जाएगा। कार्यकारी पद रानजीतिक पद होते हैं, ये ऐसे पद होते हैं जहां से राज्य के मामलों को नवीन दिशा दी जा सकती है। कार्यकारी पद की प्राप्ति के लिए स्पष्टतया उच्च शिक्षा की आवश्यकता होती है।