30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
को सहायता दिए जाने के दावे को, केन्द्र सरकार द्वारा इन दोनों विश्वविद्यालयों को भारी वित्तीय सहायता दिए जाने से बल मिलता है। इन विश्वविद्यालयों को दिया जाने वाला वास्तविक अनुदान हिंदू और मुसलमान समुदायों को उच्च शिक्षा की सहायता के लिए प्रदान किया जाता है। ऐसी स्थिति में कोई कारण नहीं कि केन्द्रीय सरकार प्रतिवर्ष इसी प्रकार का तीन लाख रूपए का अनुदान प्रदान न करे जिससे अनुसूचित जातियों में उच्च शिक्षा को प्रोन्नत किया जा सके। यदि सरकार अनुसूचित जातियों की प्रतिष्ठा उन्नत करने में रूचि लेती है, जैसा कि उसने प्रायः इस कार्य को अपना कर्तव्य घोषित किया है, तो अब समय आ गया है जब इसी प्रकार की व्यवस्था केन्द्रीय सरकार के शिक्षा-बजट में अनुसूचित जातियों के लिए की जाये।
यदि इस योजना को प्रभावी बनाया जाता है तो अनुसूचित जातियों की दशा और प्रतिष्ठा में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जायेगा। अनुसूचित जातियों को इससे बड़ी-बड़ी आशाएं हैं। वे इस बात के लिए भी तैयार हैं कि इस योजना को अनुदानों की पद्धति न बनाकर ऋण-पद्धति बना लिया जाए। अनुसूचित जातियों के जिन लड़कों को ये छात्रवृत्तियां मिलेंगी वे इसका लाभ उठाने से प्रसन्न होंगे चाहे यह राशि उनको उस समय वापिस ही क्यों न करनी पड़े जब वे रोजगार में लग जाएं अथवा उन्हें कम वेतन के वेतनमान में सेवा करने का अवसर मिले। सरकार को इन प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए किसी प्रकार की आपत्ति नहीं हो सकती।
अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा देने में सहायता के उद्देश्य से मैं दो अन्य प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं। एक प्रस्ताव यह हैः
(3)अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए स्कूल ऑफ माइन्स में
व्यवस्था ।
इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स भारत सरकार के नियंत्रण में है जो धनबाद में स्थित है। यह स्कूल खनन इंजीनियरी और भूविज्ञान में उच्च शिक्षा प्रदान करता है। इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स में दिए जाने वाले प्रशिक्षण का उद्देश्य उन व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना है जो भारत में कोयला खनन-उद्योग और अन्य खनिज-उद्योगों में सेवा कर सकते है। इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स में इस प्रकार का प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों की वर्तमान संख्या 97 है। पूछताछ करने से विदित हुआ है कि 97 विद्यार्थियों में से कोई एक विद्यार्थी भी अनुसूचित जाति का नहीं है। यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत सरकार द्वारा कुछ विशेष उपाय किए जाएं ताकि अनुसूचित जातियों के विद्यार्थी इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स से लाभ उठा सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह आवश्यक होगाः