शैक्षिक शिकायतें
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(क) अनुसूचित जातियों के ऐसे लड़कों के लिए कुछ सीटों का
आरक्षण जिन्हें प्रवेश पाने के लिए आवश्यक शिक्षा का न्यूनतम स्तर प्राप्त
है_
(ख) निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्थाः
(ग) छात्रवृत्तियों की व्यवस्था।
यह दावा करना अतिरेक कथन नहीं होगा कि अनुसूचित जातियों के लिए प्रवेश हेतु कुल 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएं। यह एक ऐसा मामला है जो श्रम विभाग के कार्यक्षेत्र में आता है, परंतु यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका संबंध वित्त विभाग से है क्योंकि निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था और छात्रवृत्तियों से सरकार के राजस्व में हानि होती है। परंतु इन साधनों के कारण हानि बहुत अधिक नहीं होगी। औसतन, वार्षिक शुल्क लगभग साठ रुपए प्रति मास होगा जो स्कूल ऑफ माइन्स में प्रति विद्यार्थी के लिए व्यय करना होगा और जिसका अर्थ यह है कि प्रति मास, प्रति विद्यार्थी 60 रु. का व्यय होगा।
- एक अन्य प्रस्ताव जिसे मैं प्रस्तुत करना चाहता हूं, इस प्रकार हैः-
(4) केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड में अनुसूचित जातियों का
प्रतिनिधित्व।
- बोर्ड का गठन इस प्रकार हैः-
(1) शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि विभाग के प्रभारी माननीय सदस्य
(अध्यक्ष)_
(2) भारत सरकार के शिक्षा-आयुक्त_
(3) भारत सरकार के दस प्रतिनिधि जिनमें से कम से कम एक
प्रतिनिधि महिला होगी_
(4) कौंसिल अॅाफ स्टेट द्वारा चयन किया गया कौंसिल ऑफ स्टेट
का एक सदस्य_
(5) विधान सभा द्वारा चुने गए विधान सभा के दो सदस्य_
(6) इंटर-यूनिवर्सिटी बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा नामांकित इंटर यूनिवर्सिटी
बोर्ड ऑफ इंडिया के तीन सदस्य_
(7) प्रत्येक स्थानीय सरकार का एक प्रतिनिधि जो शिक्षा का प्रभारी
मंत्री (अथवा उसका उपमंत्री) या डायरेक्टर ऑफ पब्लिक