44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
उनसे संबंधित तथ्यों से बोझिल नहीं बनाना चाहता। मेरी इस बात में रूचि है कि एंग्लो-इंडियन और अनुसूचित जातियों के लिए दिए गए व्यवहार में तुलनात्मक अंतर स्पष्ट किया जाए। एंग्लो-इंडियन के लिए चिंता तथा भारतीयों के लिए लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर है। वह क्या बात है जो इस विरोध को संगत ठहरा सकती है? मेरी समझ से ऐसा कुछ भी नहीं है। यदि सरकार शीघ्र ही अनुसूचित जातियों की सहायता करे तो सरकार को न्यायप्रिय समझा जाएगा। सरकार इच्छा से एंग्लो-इंडियन के उत्थान के लिए प्रतिवर्ष 1,50,000 रुपए व्यय करती है और यदि सरकार चाहे तो कुछ लाख रुपये अनुसूचित जातियों के लिए भी व्यय कर सकती है।