पीडि़त लोगों के प्रति सरकार का कर्त्तव्य
43
जाएगा जिसमें तीन रेलवे क्षेत्रों के कुछ पदों के लिए वेतन के आंकड़े दिए गए हैं और उदाहरण के तौर पर इन आंकड़ों का नमूने के रूप में चयन किया गया है- पद एंग्लो-इंडियन भारतीय
नार्थ-वेस्टर्न रेलवे
स्थायी पथ-निरीक्षक 625-25-675 475-25-500
550-25-600 400-25-450 ड्राइवर 260-10-280 1 रूपए से 1 रु. 14
आने प्रति दिन। विशेष
दर दो रूपए प्रति दिन
ईस्ट इंडिया रेलवे
गाड़ी-परीक्षक 300-25-400 120-15-180
200-20-280
जी.पी.आई. रेलवे
मुख्य ट्रेन परीक्षक 275 125-275
315
365
वाशिंग चार्जमेन 145 115
वेतन का यह अंतर 1920 तक जारी रहा। इसके बाद इसे समाप्त कर दिया गया। अब भी केवल एक अंतर शेष है कि एंग्लो-इंडियन को 55 रू. प्रति माह मूल वेतन दिया जाता है। उसे यह वेतन उस स्थिति में भी मिलता है जब वह स्टेट रेलवे में चपरासी के पद पर नियुक्त किया जाता है, जबकि भारतीय चपरासी को केवल 13-15 रु. मिलते हैं। एंग्लो-इंडियन के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार से इसकी सरकारी
खजाने से लागत प्रतिवर्ष डाक-तार विभाग के लिए दस हजार रुपये, सरकार द्वारा प्रबंधित रेलवे के लिए 75 हजार रुपये और कंपनी द्वारा प्रबंधित रेलवे के लिए 75 हजार रुपये अर्थात, कुल मिलाकर एक लाख पचास हजार रुपये होती है।
(2) एंग्लो-इंडियन को सफलतापूर्वक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तार विभाग की परीक्षा में उर्त्तीर्ण होने के लिए अंकों में कमी प्रत्येक विषय में 50 प्रतिशत से घटा कर 40 प्रतिशत और कुल अंकों में 66 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत की जाती है।
- स्टीवार्ट समिति द्वारा अनेक सिफारिशें की गई हैं जिनके अनुसार भारतीयों से अधिक एंग्लो-इंडियन लोगों को विशेष लाभ दिए गए हैं। परंतु मैं इस ज्ञापन को