46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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ऽ सर एस. क्रिप्स की टिप्पणी
(एल/पी एंड जे/10/4ः एफ एफ 51-2)
दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व कर रहे डाक्टर अम्बेडकर और
श्री राजा के साथ साक्षात्कार
30 मार्च, 1942
दलित वर्गों, विशेषकर मद्रास और बम्बई के दलित वर्गों, की दशा के बारे में बताते हुए उन्होंने मुझसे यह कहा कि वर्तमान चुनाव पद्धति के अनुसार दलित वर्गों को संविधान सभा में बहुत ही कम प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा क्योंकि संविधान सभा में उनके अधिकतर तथाकथित प्रतिनिधि कांग्रेस के हैं और इसलिए दलित वर्गों की स्थिति बहुत कमजोर होगी। उन्होंने उन मांगों का सारांश रूप प्रस्तुत किया जिन्हें वे संविधान सभा के समक्ष रखना चाहते हैं और इसके बाद मुझसे पूछा कि क्या हमने कभी सोचा है कि वे जातीय और धार्मिक दृष्टि से अल्प-संख्यक वर्ग के अंतर्गत आते हैं जिसके बारे में मैंने उत्तर में ‘हां’ कहा तथा बताया कि उनके संरक्षण के लिए संधि में किस प्रकार व्यवस्थाएं की जायेंगी। मैंने बताया कि ये संरक्षण लीग ऑफ नेशन्स की अल्पसंख्यक संधियों के आधार के अनुरूप होंगे और यदि पहले ही संविधान में विशेष उपबंध हुए तो इन्हें शायद संधि में दोहराया जाएगा और विवाद के मामलों में यह दायित्व होगा कि इन्हें किसी बाह्य प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। भारत सरकार इस प्रकार के निर्णय से बाध्य होगी और यदि सरकार ने ऐसा नहीं किया तो इसे संधि-विच्छेद माना जाएगा। इसके फलस्वरूप, ब्रिटिश सरकार ऐसे कदम उठाएगी जो विशेष परिस्थितियों में बुद्धिसम्मत समझे जाएं। मैंने बताया कि यद्यपि संरक्षण का यह रूप निस्संदेह उनके लिए अपर्याप्त समझा जाएगा तथापि
ऽ द ट्रांसफर ऑफ पवर, निकॉलस मैनसर्घ, प्रधान संपादक, महामहिम स्टेशनरी, ऑफिस, लंदन द्वारा
प्रकाशित 1970_ खंड 1, संख्या 442, पृष्ठ 552-53