सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार
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स्वायत शासन तथा भारत में आत्मनिर्णय के विचार की स्वीकृति दे दिए जाने के बाद ऐसा कोई मार्ग संभव नहीं होगा जिससे हम भारत में किसी अल्पसंख्यक के बचाव के लिए हस्तक्षेप कर सकें।
जहां तक अंतरिम अवधि का संबंध है, मैंने यह बताया कि ऐसी संभावनाएं दलित वर्गों के कुछ प्रतिनिधियों के लिए हो सकती है कि उन्हें केन्द्र में कार्यकारी परिषद् में लिया जाए और इस परिषद् के प्रथम कार्यों में से एक कार्य निस्संदेह यह होगा कि प्रांतीय सरकारों के चलाने के संबंध में कुछ अस्थायी प्रबंध किए जाएं।
अम्बेडकर ने यह विचार व्यक्त किया कि वे लोग इस बात की मांग करेंगे कि उन्हें वायसराय द्वारा नवीन कार्यकारी परिषद् के गठन में परामर्श देने के लिए कहा जाए और उन्हें प्रमुख तत्वों में से एक तत्व माना जाए। मैंने यह बताया कि यह मामला मुझसे संबंधित नहीं है। वायसराय को स्वयं अपने निर्णय को कार्यान्वित करना था कि वह इस मामले में परामर्श के लिए किसे बुलाएं ।
स्वाभाविक रूप से वे इस पूरी स्थिति के प्रति बहुत प्रसन्न नहीं थे, परंतु मुझे यह सूचना नहीं मिली कि वे इस योजना का विरोध करेंगे क्योंकि ऐसा अन्य कोई विकल्प नहीं था जिसके अधीन वे अपने संरक्षण के लिए इससे अधिक अच्छा साधन प्राप्त कर सके।