2. डा. अम्बेडकर और श्री राजा का सर एस. क्रिप्स को पत्र - Page 63

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

2

डॉ. अम्बेडकर और श्री राजा का सर एस.

क्रिप्स को पत्र [@]

सीएमडी. 6350

1 अप्रैल, 1942

जब हम आपसे 30 मार्च [†] को मिले थे तो आपको हमने बताया था कि भारत के संवैधानिक विकास से संबंधित महामहिम सरकार के प्रस्ताव दलित वर्गो को स्वीकार नहीं होंगे और उन कारणों को भी हमने साक्षात्कार के समय आपके समक्ष प्रस्तुत किया था। तब से हमने विभिन्न प्रांतीय और केन्द्रीय विधान सभाओं में दलित वर्गो के अनेक प्रतिनिधियों से परामर्श किया है और उन सभी ने सर्वसम्मति से उस विचार की पुष्टि की है जो हमने इन प्रस्तावों के संबंध में आपके समक्ष रखे थे।

हम सभी का दृढ़ विश्वास है कि ये प्रस्ताव दलित वर्गो को अधिकतम हानि पहुंंचाने वाले हैं और निश्चित रूप से उन्हें हिंदू-राज्य पद्धति के अधीन कर देंगे। इस प्रकार का कोई भी परिणाम जो हमें अतीत के अंधकार युग में ले जाता हो, हमारे द्वारा कभी भी सहन नहीं होगा और हम सभी इस बात के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि यदि हमारे लोगों पर ऐसा संकट आएगा जो हम अपने समस्त साधनों से उसका डटकर सामना करेंगे।

हमारी आपसे यह प्रार्थना है कि आप दलित वर्गों के भविष्य के संबंध में हमारी घोर चिंता महामहिम को बता दें और उनके मन में यह धारणा पैदा कर दें कि हम इसे विश्वासघात समझेंगे यदि महामहिम की सरकार दलित वर्गों के लिए ऐसे संविधान को लागू कराने का निर्णय करे जिसके लिए उन्होंने अपनी उन्मुक्त और स्वैच्छिक अनुमति नहीं दी है तथा जिनमें वे सभी उपबंध नहीं है जो दलित वर्ग के हितों को सुरक्षित रखने के लिए होने चाहिए।

ऽ द ट्रांसफर ऑफ पावर, खंड 1, संख्या 487, पृष्ठ 603

@ इस पत्र का पाठ लार्ड लिनलिथयों द्वारा श्री ऐमरी को तार 207-एस.सी., 18 अप्रैल एम एस.एस. ई.

यू.आर.एफ. 125/22 द्वारा प्रेषित किया गया।

† संख्या 442