1. मताधिकार के बारे में साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य - Page 22

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साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य
लिखित बयान

प्रो. ए.बी. हार्ट ने कहा है, ‘‘सरकार के सामने सबसे कठिन और बड़ा सवाल यह होता है कि व्यक्तिगत राय और पसंद की ताकत को लोक - कर्म में किस प्रकार लगाया जाए। लोक संस्थाओं की भी यही समस्या है।’’ लेकिन लोकप्रिय सरकार की यह केवल आधी परिभाषा है। अतः दूसरे आधे भाग पर जोर देना भी जरूरी है। महत्व की दृष्टि से वह पहले आधे भाग से बढ़कर नहीं है, उसके बराबर तो है ही। चूंकि व्यक्तिगत क्षमताओं के प्रयोग के लिए सरकार सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, यह लोक - हित में होगा कि किसी भी व्यक्ति को सरकार की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के अवसर से वंचित न किया जाए। दूसरे शब्दों में, यह कहा जा सकता है कि लोकप्रिय सरकार का अर्थ केवल जनता के लिए सरकार से नहीं है, बल्कि जनता की सरकार से भी है। इसी बात को इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि मात्र विचारों को प्रतिनिधित्व देना लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए पर्याप्त नहीं है। उसको सही अर्थ में चरितार्थ करने के लिए उसमें व्यक्तियों के प्रतिनिधित्व का होना भी आवश्यक है। सरकार में प्रायः विचारों का प्रतिनिधित्व तो होता है, पर व्यक्तियों का नहीं। अतः भारत में लोकप्रिय सरकार के लिए मताधिकार और निर्वाचन - क्षेत्रों की व्यवस्था करते समय मताधिकार समिति को यह ध्यान रखना है कि वह दोनों; अर्थात् विचारों के प्रतिनिधित्व और व्यक्तियों के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करे। मताधिकार तथा निर्वाचन - क्षेत्रों की जो योजना यह व्यवस्था नहीं कर पाती, वह लोकप्रिय सरकार का गठन भी नहीं कर सकती।

  1. इस कार्य में अंततः तभी सफलता मिल सकेगी, जब उस समाज का वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर लिया जाए, जिसे लोकप्रिय सरकार का रूप दिया जाना है। वास्तविक भारत का चित्रण लार्ड डफरिन ने इस प्रकार किया हैः

वह एक ऐसा जनसमूह है...जिसमें अलग - अलग प्रकार की अनेक जातियां हैं। उनके

धर्म, अनुष्ठान तथा भाषाएं अलग - अलग हैं। उनमें से अनेक के बीच और भी गहरा

अलगाव है। उनके पूर्वग्रह, आचार - व्यवहार के स्रोत और यहां तक कि भौतिक हित भी