236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
ये दोनों तथ्य कटु हैं और जो लोग इस न्यून उत्पादकता के कारणों की जांच कर रहे हैं, वे भौचके रह गए हैं। इसलिए अब जोतों के अत्यधिक विखंड और बिखरे होने पर लोगों का ध्यान तेजी से गया है। अब बड़े अधिकारपूर्वक यह तर्क दिया जाने लगा है कि जोतों का आकार बड़ा कर दिया जाए और चकबंदी कर दी जाए। इसी के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ जाएगी।
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जहां जोतों की चकबंदी एक व्यावहारिक समस्या है, वहां उनका आकार बड़ा करना एक सैंद्धांतिक समस्या है, जिसमें आपको उस सिद्धांत पर विचार करना पड़ेगा, जिस पर जोतों का आकार निर्भर करता है। जोतों का आकार बड़ा करने के सैद्धांतिक प्रश्न पर विचार को स्थगित करने पर हम देखते हैं कि चकबंदी की समस्या के कारण दो प्रश्न उठ खड़े होते हैं - (1) वर्तमान छोटी - छोटी और बिखरी हुई जोतों को कैसे स्वीकृत किया जाए, और (2) एक बार चकबंदी हो जाने के बाद उनका वही आकार कैसे बरकरार रखा जाए। आइए, हम इन प्रश्नों पर बारी - बारी से विचार करें। भूमि के उप - विभाजन के कारण वह होना जरूरी नहीं, जिसे हम भूमि का विखंडन कहते हैं। परंतु दुर्भाग्वश होता ऐसा ही है, क्योंकि मृत व्यक्ति का हर वारिस कहता है कि बंटवारा इस तरह किया जाए कि मृत व्यक्ति की कुल भूमि के हर सर्वे नंबर में से उसे हिस्सा मिले। वे ऐसा बंटवारा नहीं करते कि हर व्यक्ति को यथासंभव अलग - अलग पूरे सर्वे नंबर मिल जाएं। दूसरे शब्दों में, सर्वे नंबर के हिसाब से जमीन चाहने की जगह वे हर सर्वे नंबर में से हिस्सा चाहते हैं, जिसके कारण भूमि का विखंडन हो जाता है। यद्यपि इस तरह विखंडन से हर व्यक्ति के लिए बंटवारा तो न्यायोचित हो जाता है, पर उसके कारण भारत में कृषि उतनी ही कम लाभप्रद हो जाती है, जैसी किसी समय में यूरोप में थी। इससे श्रम और पशु - शक्ति की बरबादी होती है, बाड़े लगाने और सीमा बांधने में भूमि बरबाद होती है और खाद की बरबादी होती है। इससे फसलों की देखभाल करना, कुएं खोदना और श्रम की बचत करने वाले औजारों का उपयोग करना व्यावहारिक नहीं रहता। काश्तकारी में परिवर्तन लाना, सड़कें बनाना, सिंचाई की नालियां बनाना, आदि कठिन हो जाता है और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। भूमि के विखंडन की ये हानियां इसलिए निभाई जाती हैं कि भूमि के टुकड़ों की चकबंदी की उनकी बात को समर्थन मिल सके। इस चकबंदी के कई तरीके होते हैं, यद्यपि सभी एक जैसे लाभकारी नहीं होते। इस बात की संभावना नहीं है कि लोग स्वेच्छा से अपने जमीन के विखंडित टुकड़ों को एक करने पर सहमत हो जाएंगे। परंतु कब्जे के अधिकारों (आक्यूपेंसी राइ्टस) की सीमित बिक्री से काफी कुछ प्राप्त किए जाने की संभावना है। इसके अंतर्गत जब कोई मालिक अपनी जमीन छोड़ता है या अपने हिस्से का कर न