1. मताधिकार के बारे में साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य - Page 49

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

दलित वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने से मना कर दिया है। ऐसा करके उसने जान - बूझकर महानतम हितों को खतरों की सबसे गहरी खाई में फेंक दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि समिति ऐसा नहीं होने देगी।

  1. साठ में से सात सीटों को निकाल कर शेष 53 के बारे में मेरा प्रस्ताव है कि उन्हें 26 जिलों की स्पृश्य जनसंख्या में इस प्रकार बांट दिया जाए :

भले ही मैं सरकार से पूरी तरह सहमत नहीं हो सकता, फिर भी मैं अपनी स्वीकृति देता हूं कि जिलावर दो के हिसाब से सिंध के सात जिले 14 सदस्य चुनें। लेकिन जो 19 जिले सिंध के बाहर हैं, उनके लिए मेरा विचार है कि दो सदस्यों वाला निर्वाचन - क्षेत्र पर्याप्त नहीं होगा। मुख्यतः उसका कारण यह है कि स्पृश्य हिन्दू जनसंख्या सजातीय नहीं है। स्पृश्य हिन्दुओं के उप - विभाजनों की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हमें कम से कम कुछ मामलों में तो दो - सदस्यीय निर्वाचन - क्षेत्र के सिद्धांत को छोड़ना होगा।

[91(2)] विचाराधीन 19 जिलों के बीच उन 39 सीटों को बांटने के लिए मैं पहले भाषा के आधार पर जिलों के समूह इस प्रकार बनाना चाहूंगा :

जिले स्पृश्य हिन्दू जनसंख्या

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स्पृश्य हिन्दू जनसंख्या

  1. गुजराती

(1) अहमदाबाद 614,286

(2) भड़ोंच 170,545

(3) खेड़ा 556,667

(4) पंचमहाल 259,929

(5) सूरत 535,236

कुल योग 21,36,663

  1. मराठी

(1) थाणे 736,915

(2) कोलाबा 509,158

(3) रत्नागिरी 1,003,240

(4) अहमदनगर 738,747

(5) खानदेश पूर्व 789,740

(6) खानदेश पश्चिम 437,391

(7) नासिक 745,965

(8) सतारा 883,488

(9) पूना 858,607

(10) शोलापुर 574,152

कुल योग 72,77,403

Col1 Col2
72]77]4 03

कुल योग