1. मताधिकार के बारे में साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य - Page 48

साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य

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  1. विभिन्न प्रमुख निर्वाचन - क्षेत्रों में सरकार ने जो सीटें निर्धारित की हैं, सर्वप्रथम तो मैं उनकी संख्या में कुछ परिवर्तनों का प्रस्ताव करना चाहूंगा। प्रस्तावित अनेक परिवर्तनों को नीचे दी गई सारणी में दर्शाया गया है।
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का बंटवारा

1 - सिंध के जमींदार और जागीरदार 1 1 2 - गुजरात के सरदार 1 1 3 - दक्षिण के सरदार 1 1 4 - बंबई विश्वविद्यालय 2 2 5 - यूरोपीय 4 4 6 - सिंध के हिन्दू 3 4 7 - मुसलमान 18 10 8 - छह नगर 18 17 9 - प्रेसिडेंसी के 26 जिले 52 60

कुल योग 100 100

  1. जहां तक उक्त निर्वाचन - क्षेत्रों में 1, 2, 3, 4, और 5 के लिए प्रस्तावित निर्वाचन - प्रणाली का संबंध है, मैं सरकार से सहमत हूं।

  2. सरकार ने सिंध के हिन्दुओं के लिए तीन सीटें रिजर्व की हैं। मैंने उनके लिए चार का प्रस्ताव किया है। उनमें से एक सिंध के अस्पृश्यों के लिए अलग से निर्धारित की जाए और उसे संप्रदाय आधारित निर्वाचक - मंडल द्वारा भरा जाए।

  3. छह नगरों के लिए मैंने 17 सीटें रिजर्व की हैं। मेरा प्रस्ताव है कि इनमें से दस बंबई को दी जाएं। दस में से एक सीट नगर के अस्पृश्यों को दी जाए और उसे संप्रदाय आधारित निर्वाचक - मंडल द्वारा भरा जाए।

  4. अभी तक यह दर्शाया गया है कि सिंध के अस्पृश्यों तथा बंबई में उनके भाइयों के लिए कैसे व्यवस्था की जा सकती है। इन दो सीटों के अलावा प्रेसिडेंसी खास (बंबई नगर को छोड़कर) के अस्पृश्यों को सात सीटें आबंटित की जाएंगी। यह मैंने अपने पिछले बयान के पृष्ठ 32 पर बता दिया है। इस प्रकार प्रेसिडेंसी के अस्पृश्यों के लिए नौ सीटों की व्यवस्था की जाए। दलित वर्गों की परिभाषा करने में बंबई सरकार कठिनाई अनुभव कर रही है।

कठिनाई कोई वास्तविक कठिनाई नहीं है, क्योंकि सभी व्यावहारिक प्रयोजनों के लिए अस्पृश्य तथा दलित वर्ग में कोई भेद नहीं है। अस्पृश्यों की अधोगति के बारे में बंबई सरकार को पूरी जानकारी है। अतः उसकी कठोरता खेदजनक है। बंबई सरकार ने