34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
1 2 3 4 (8) सतारा 883,488 8 * (9) पूना 858,607 9 3 (10) शोलापुर 574,152 10 3
- कन्नड़
(1) बेलगांव 1,411,639 11 4 (2) बीजापुर
(3) धारवाड़
(4) कनारा 1,193,202 12 4 19 जिलों के प्रतिनिधियों की कुल संख्या 39 है।
* मूल में सतारा जिले के लिए कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है।
ऐसे समूह बनाने के मुख्य लाभ यह है कि संप्रदाय आधारित प्रतिनिधित्व के बिना ही मराठों तथा लिंगायतों की मांग पूरी हो सकती है। कोई जिला इस बात की पवित्रता का दावा नहीं कर सकता कि राजनीतिक प्रयोजनों के लिए उसकी सीमाओं का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता, जबकि ऐसा अतिक्रमण हमें संप्रदाय आधारित प्रतिनिधित्व के क्षेत्र को न्यूनतम रखने में समर्थ बनाता है।
मुसलमानों को कितने प्रतिनिधि दिए जाएं, इस बारे में बंबई सरकार से मेरा मतभेद है। जनसंख्या और कांग्रेस योजना के दो आधारों में से बंबई सरकार ने कांग्रेस योजना को तरजीह दी है और तर्क को ताक पर रख दिया है। ऐसा करते समय उसने सुधार योजना के निर्माताओं की सुनिश्चित राय की उपेक्षा की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस - लीग योजना में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व के अनुपात के बारे में वार्ता के अलावा और कोई आधार नहीं हो सकता। इस बात पर आग्रह करना ही होगा कि कांग्रेस के गठन को देखा जाए तो वह एक ऐसी संस्था है कि प्रतिनिधि के तौर पर उसके वायदे उस विशाल जनसमूह पर लादे नहीं जा सकते, जिसने विचार - विमर्श में हिस्सा ही नहीं लिया है।
इस प्रेसिडेंसी में मुसलमानों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 20 प्रतिशत है। अतः जनसंख्या के आधार पर वे निर्वाचन की 100 सीटों में से सिर्फ 20 सीटों के हकदार हैं। लेकिन यदि जनसंख्या में आवश्यकता को जोड़ दिया जाए तो मेरे विचार में उन्हें 24 सीटों से संतुष्ट हो जाना चाहिए। यह लक्ष्मण रेखा है और इसके उल्लंघन को सहन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके उल्लंघन से अन्य समुदाय घाटे में रहेंगे। इन 24 सीटों में से सिंध के सात जिले प्रति जिला दो के हिसाब से 14 मुसलमान चुनकर भेजेंगे। अन्य 10 सीटों का बंटवारा आगे दी गई सारणी के अनुसार हो सकता है :