38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
श्री नटराजन : उनका विचार था कि भारत में ब्रिटिश शासन का उद्देश्य है कि सभी को समान अवसर दिए जाएं। लोकप्रिय विधान सभाओं को सत्ता का अधिकांश भाग सौंपते समय ऐसी व्यवस्था की जाए कि राजनीतिक संस्थाओं में सामाजिक प्रणाली से जुड़ी कठिनाइयां और असुविधाएं न तो दुहराई जाएं और न ही सनातन बनाई जाएं। जहां तक वर्तमान यथार्थ स्थिति का संबंध है, उन्होंने स्वीकार किया और मिसाल दी कि जैसे परेल स्कूल में, जो दलित वर्गों के लिए है, वहां अनेक उच्च जाति के छात्र हैं। वह एक अच्छा स्कूल है, अतः वे गए। उसी प्रकार स्वयं डॉ. अम्बेडकर प्रोफेसर हैं और दलित वर्ग के हैं। सभी वर्गों के छात्र उनके शिष्य हैं और उन्हें उच्च जाति के शिष्यों को पढ़ाने में कोई कठिनाई नहीं होती। यदि सीटें देकर सरकार अस्पृश्य वर्गों को मान्यता दे तो उनका दर्जा ऊंजा हो जाएगा और उनकी शक्तियां जागृत होंगी। उनकी सीटों की संख्या के बारे में उनका कोई विशेष आग्रह नहीं है। वह तो बस इतना ही चाहते हैं कि जो व्यवस्था हो, वह पर्याप्त हो।
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24 जनवरी, 1919 और 31 जनवरी, 1919 के बीच बंबई में निम्न व्यक्तियों को
(1) एल.सी. क्रम्प, एस्क्वायर, आई.सी.एस., बंबई सरकार के प्रतिनिधि (24 जनवरी,
1919),
(2) आनरेबिल मेजरसी. फर्नान्डेज, एम.डी.आई.एम.एस. (अस्थायी) (24 जनवरी,
1919),
(3) द रेवरेन्ड केनन डी.एल. जोशी, बाम्बे इंडियन क्रिश्चियन (प्रोटेस्टेन्ट) एसोसियेशन,
के प्रतिनिधि (24 जनवरी, 1919),
(4) लेफ्टिनेंट कर्नल एच.ए.जे. गिड्ने, आई.एम.एस. (अवकाश प्राप्त), एंग्लो इंडियन
एंपायर लीग (बंबई शाखा) (25 जनवरी, 1919),
(5) सर जमशेदजी जीजीभोय, बी.ए.आर.टी. (25 जनवरी, 1919),
(6) डब्ल्यू.ए. हेग ब्राउन, एस्क्वायर, यूरोपियन एसोसियेशन की बंबई शाखा के प्रतिनिधि
(25 जनवरी, 1919),
(7) श्री डी.डी. सथाये, बाम्बे नेशनल यूनियन के प्रतिनिधि (25 जनवरी, 1919), (8) द आनरेबिल श्री एम.ए. जिन्ना (25 जनवरी, 1919),
(9) श्री सी.एन. वाडिया, बंबई मिल मालिक संघ के प्रतिनिधि (27 जनवरी, 1919), (10) श्री वी.आर. शिन्दे (27 जनवरी, 1919),
(11) श्री के.आर. कोरेगावकर, मराठा आईक्येचू सभा के प्रतिनिधि (27 जनवरी,
1919),
(12) द आनरेबिल श्री एम.ए. जिन्ना (27 जनवरी, 1919),