1. मताधिकार के बारे में साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य - Page 54

साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य

37

उन्होंने दलित वर्गों के लिए बड़े निर्वाचन - क्षेत्रों का सुझाव दिया है। उनका विचवार है कि यदि मुसलमानों के लिए ऐसे बड़े निर्वाचन - क्षेत्रों को स्वीकार किया गया है तो क्या कारण है कि वे दलित वर्गों के लिए व्यावहारिक सिद्ध नहीं हो सकते।

दलित वर्गों को पर्याप्त संख्या में सीटें मिल सकें, इसके लिए उनका सुझाव है कि मुसलमानों के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित 18 सीटों को घटाकर दस कर दिया जाए। उन्हें घटाने का औचित्य है, क्योंकि जनसंख्या के आधार पर मुसलमान केवल 20 प्रतिशत सीटों के हकदार हैं। उनका विचार है कि कांग्रेस - लीग समझौता सबके लिए बाध्यकारी नहीं है।

श्री हेली : अस्पृश्य वे लोग हैं, जिन्हें नागरिकता के कतिपय अधिकारों से वंचित किया गया है। जैसे, सड़क पर चलने का अधिकार तो हर नागरिक को है और यदि किसी व्यक्ति को ऐसा करने से रोका जाता है तो भले ही अस्थायी रूप से हो, यह उसके अधिकार का उल्लंघन है। उसके लिए इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता कि उसके अधिकार के प्रयोग में कानून द्वरा बाधा डाला गई या सामाजिक प्रथा द्वारा। सरकार ने इस कुरीति को पहचान लिया था और अस्पृश्य वर्गों के लोगों को सरकारी नौकरी में लिया था।

उनका सुझाव है कि दलित वर्गों के लिए मताधिकार संबंधी अर्हता के स्तर को कम किया जाए, क्योंकि सरकार का यह उद्देश्य होना चाहिए कि वह इस समुदाय की दशा सुधारे।

जनगणना रिपोर्ट को देखकर उन्होंने कहा है कि स्पृश्य और अस्पृश्य की समस्या सिंध में है, भले ही वहां की जनसंख्या में मुसलमानों का अनुपात अधिक है, पर वहां हिन्दू भी हैं। यदि सिंध के हिन्दुओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है, तो उनका विचार है कि दलित वर्गों के लिए भी विशेष व्यवस्था क्यों न की जाए।

श्री बेनर्जी : दलित वर्ग ऐसे नौ व्यक्तियों का पता कर सकेंगे, जो अंग्रेजी बोल सकते हों और काउसिंल में उनके हित का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैट्रीकुलेशन से नीचे का स्तर छठी जमात का है और जो छठी जमात पास कर लेगा, वह काउसिंल में वाद - विवाद को समझ सकेगा। उनके बीच कोई 25 ऐसे लोग हैं, जिन्होंने छठी जमात पास कर ली है।

राजनीतिक प्रयोजनों के लिए दलित वर्गों की परिभाषा करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। दलित और अस्पृश्य में कोई भेद नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो दलित वर्ग का सदस्य नहीं है, ऐसी बात मन में नहीं लाएगा कि वह स्वयं को दलित या अस्पृश्य जताने का प्रयास करे, जब कि पिछड़े वर्गों के मामले में ऐसा हो सकता है।

उन्हें स्वीकार है कि दलित वर्गों के लिए कम से कम आठ प्रतिनिधि हों और उन्हें चुना जाए। नामजद प्रतिनिधि उनके हितों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा।

श्री क्रम्प : सिंध में अस्पृश्य वर्गों की समस्या और दशा के बारे में उन्हें कोई अनुभव नहीं है और वह इस कथन के बारे में कुछ नहीं कह सकते कि वहां केवल एक ही ऐसा वर्ग है, अर्थात् भंगियों का। उनकी सूचना है कि सिंध में हिन्दुओं की कुल जनसंख्या 837,426 है और अस्पृश्य वर्गों की कुल जनसंख्या 135,224 है।